हाईकोर्ट बेंच की मांग पर भड़के अधिवक्ता, कैंट विधायक अमित अग्रवाल की कार को धक्का देकर कचहरी से निकाला

कार पर चिपकाए बेंच समर्थक पोस्टर, भाजपा नेताओं के कचहरी में प्रवेश पर रोक लगाने की चेतावनी; विधानसभा चुनाव में भी विरोध का ऐलान

मेरठ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर अधिवक्ताओं का आंदोलन सोमवार को और उग्र हो गया। मेरठ कचहरी परिसर में अधिवक्ताओं ने कैंट विधायक अमित अग्रवाल की कार को निशाना बनाकर विरोध प्रदर्शन किया। कार पर हाईकोर्ट बेंच के समर्थन वाले पोस्टर चिपकाए और फिर धक्का देकर कचहरी परिसर से बाहर निकाल दिया। घटना के समय विधायक कार में मौजूद नहीं थे। विरोध प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

भाजपा नेताओं के प्रवेश पर रोक की चेतावनी

विधायक की कार पर भाजपा के झंडे लगे थे और उस पर विधायक लिखा हुआ था। अधिवक्ताओं ने कार के जरिए अपना विरोध जताते हुए दो टूक कहा कि जब तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना नहीं होती, तब तक भाजपा नेताओं को कचहरी परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। उनका कहना था कि लंबे समय से मांग उठाने के बावजूद केंद्र और प्रदेश सरकार इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठा रही हैं।

बार एसोसिएशन के पदाधिकारी भी पहुंचे

विरोध प्रदर्शन की जानकारी मिलने पर मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं हाईकोर्ट बेंच संघर्ष समिति के चेयरमैन अनुज शर्मा मौके पर पहुंचे। उनके साथ बार एसोसिएशन के महामंत्री और संघर्ष समिति के संयोजक परवेज आलम भी समर्थकों के साथ पहुंचे। अधिवक्ताओं ने एक बार फिर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना को आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बताया।

विधानसभा चुनाव में भाजपा का विरोध करने का ऐलान

प्रदर्शन के दौरान कुछ अधिवक्ताओं ने आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों का विरोध करने की बात कही। उन्होंने अपील की कि भाजपा प्रत्याशियों को हराने वाले उम्मीदवारों का समर्थन किया जाए। साथ ही भाजपा नेताओं के मुकदमों की पैरवी नहीं करने की अपील भी की गई।

आंदोलन को लेकर अधिवक्ताओं में मतभेद

हालांकि, सभी अधिवक्ता इस रुख से सहमत नहीं हैं। कुछ अधिवक्ताओं का कहना है कि स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं का इस मामले में कोई दोष नहीं है। वे तो अधिवक्ताओं की मांग को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में विरोध का निशाना स्थानीय कार्यकर्ताओं को बनाने के बजाय सरकार और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर होना चाहिए।

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