होर्मुज में अमेरिका का ईरान पर बड़ा हमला, केशम द्वीप पर गूंजे धमाके; मिडिल ईस्ट में युद्ध का खतरा बढ़ा

अमेरिकी सेना ने ईरानी ठिकानों पर की रक्षात्मक सैन्य कार्रवाई, ईरानी सरकारी मीडिया ने विस्फोटों की पुष्टि की; नेतन्याहू पर ट्रंप को हमले के लिए दबाव बनाने का आरोप

तेहरान/वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। मंगलवार सुबह अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करते हुए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण केशम द्वीप को निशाना बनाया। होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थित इस द्वीप पर कई जोरदार धमाके हुए। ईरान की सरकारी मीडिया ने भी विस्फोटों की पुष्टि की है। अमेरिकी कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है और बड़े सैन्य टकराव की आशंका गहरा गई है।

एसोसिएटेड प्रेस (एपी) की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के कुछ ठिकानों पर रक्षात्मक हमले किए हैं। हालांकि, हमले में हुए नुकसान और संभावित हताहतों को लेकर फिलहाल विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

रणनीतिक रूप से बेहद अहम है केशम द्वीप

ईरान का केशम द्वीप होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थित है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी सैन्य कार्रवाई का असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

ट्रंप ने हमले का विकल्प रखा था खुला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही संकेत दे चुके थे कि ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला हुआ है। हाल के दिनों में अमेरिका के मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान पर नए हमले की अटकलें तेज थीं। इसी बीच मंगलवार सुबह हुए धमाकों ने इन आशंकाओं को और बढ़ा दिया है।

नेतन्याहू बना रहे थे हमले का दबाव

रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पर ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू करने का दबाव बना रहे थे। उनकी कोशिश थी कि अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान पर नए हवाई हमले किए जाएं।

अमेरिकी सहयोगियों को किया गया था सतर्क

इससे पहले अमेरिकी अधिकारियों ने पश्चिम एशिया के कई देशों और क्षेत्रीय सहयोगियों को संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर सतर्क रहने को कहा था। सहयोगियों को ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई के लिए भी तैयार रहने की सलाह दी गई थी। हालांकि, मध्य पूर्व के कई अमेरिकी सहयोगी देश ईरान पर नए हमलों के पक्ष में नहीं हैं। उन्हें आशंका है कि अमेरिका की सैन्य कार्रवाई से पूरा क्षेत्र बड़े संघर्ष की चपेट में आ सकता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ईरान इस हमले का जवाब किस तरह देता है। यदि जवाबी कार्रवाई होती है तो होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और बढ़ सकता है, जिसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति से लेकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार तक दिखाई दे सकता है।

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