कानपुर: सरकारी डॉक्टर ने खुद को गोली से उड़ाया
- 7 साल पहले हुई थी शादी, रात 2 बजे लाइसेंसी रिवाल्वर से किया सुसाइडकानपुर (एजेंसी)।कानपुर में सरकारी डॉक्टर ने सुसाइड कर लिया। उन्होंने लाइसेंसी रिवाल्वर से खुद को सीने में गोली मार ली। गोली चलने की आवाज सुनकर पत्नी कमरे में पहुंची तो डॉक्टर जमीन पर खून से लथपथ पड़े थे।
परिवार के लोग डॉक्टर संदीप सिंह (47) को रीजेंसी अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना रविवार रात करीब 2 बजे निराला नगर के ब्लॉसम अपार्टमेंट की है। डॉक्टर संदीप सिंह सर्जन थे और कानपुर देहात में तैनात थे।
संदीप के पिता राज बहादुर ने बताया, “रात में बहू कंचन का फोन आया था। बोली- संदीप ने खुद को गोली मार ली है। अस्पताल ले जा रही हूं। मैंने कहा- तुम बहुत धर्मात्मा बनती हो, जियो अपने हिसाब से।” डीसीपी दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि फोरेंसिक टीम ने रिवाल्वर जब्त कर लिया है।
संदीप सिंह लाल बंगला के परदेवनपुरवा के रहने वाले थे। उनके पिता का नाम राज बहादुर सिंह है। संदीप चार भाई, विशाल सिंह, विक्रम सिंह व राहुल सिंह थे। विशाल का बीमारी से निधन हो गया था, जबकि राहुल सिंह की नोएडा में हिट एंड रन केस में मौत हो गई थी। पिता राजबहादुर सेना में सूबेदार के पद से रिटायर्ड थे।
पिता राज बहादुर पत्नी और छोटे बेटे विक्रम के साथ परदेवनपुरवा में रहते हैं। वहीं, डॉ. संदीप निराला नगर स्थित ब्लॉसम अपार्टमेंट में पत्नी कंचन, बेटी और 2 महीने के बेटे के साथ माता-पिता से अलग रहते थे।
सात साल पहले की थी दूसरी शादी
चचेरे भाई मोहित ने बताया- संदीप की पहली शादी 2007 में कानपुर की एमबीबीएस डॉक्टर कीर्ति सिंह से हुई थी, जिनसे उनका एक 12 साल का बेटा है। दोनों का म्युचुअल अंडरस्टैंडिग से 2018 में तलाक हो गया था। जिसके बाद 2019 में उन्होंने कासगंज निवासी कंचन सिंह से लव मैरिज की थी। कंचन हाउस वाइफ हैं, उनके एक बेटा- बेटी हैं। 4 साल की माही और दो माह का बेटा है।
पिता राज बहादुर ने बताया- शादी के कुछ समय बाद ही संदीप और कंचन के बीच छोटी-छोटी बातों को लेकर विवाद होने लगे थे। जानकारी मिलने पर वह अक्सर दोनों को समझाकर शांत करा देते थे। उन्होंने बताया- संदीप से कल रात 9:30 बजे आखिरी बार बात हुई थी। मैंने बेटे से हालचाल पूछा। देर रात पत्नी से किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ। रात दो बजे उन्होंने कमरे लाइसेंसी रिवाल्वर निकाली। इसके बाद उन्होंने भगवान के कमरे में जाकर लड्डू गोपाल के पैर छुए, फिर मंदिर के सामने बैठ कर सीने में गोली मार ली।


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