करवा चौथ पर मेहंदी सेवा शिविर, विद्यार्थियों को मिला हुनर से कमाई का अवसर

सीसीएसयू में ‘लर्न टू अर्न’ पहल के तहत आयोजन, भारतीय लोक कला और सांस्कृतिक परंपराओं को किया साकार

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला की प्रेरणा एवं दिशा-निर्देशन में करवा चौथ के अवसर पर ललित कला संस्थान, राज्य ललित कला अकादमी उत्तर प्रदेश तथा महिला अध्ययन केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में मेहंदी सेवा शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में ललित कला संस्थान के विद्यार्थियों ने अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के हाथों पर आकर्षक मेहंदी डिजाइन बनाए। आयोजन का उद्देश्य भारतीय लोक कला और सांस्कृतिक परंपराओं को बढ़ावा देने के साथ विद्यार्थियों को हुनर के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने के अवसर प्रदान करना रहा।

पारंपरिक कलाओं से आत्मनिर्भरता का संदेश

शिविर के अवसर पर कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने महिलाओं को करवा चौथ की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भारतीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण में ऐसे आयोजनों के महत्व को रेखांकित करते हुए विद्यार्थियों की रचनात्मकता, कलात्मक हुनर और समर्पण की सराहना की। उन्होंने कला को आत्मनिर्भरता और रोजगार का सशक्त माध्यम बताया।

शिविर में विश्वविद्यालय की महिला प्राध्यापकों, शिक्षिकाओं, कर्मचारियों और श्रमिक महिलाओं के साथ परिसर के बाहर की कामकाजी एवं घरेलू महिलाओं ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों ने ‘लर्न टू अर्न’ यानी सीखो और कमाओ की भावना के तहत महिलाओं के हाथों पर सुंदर मेहंदी लगाई।

मेहंदी डिजाइनों में दिखी भारतीय संस्कृति की झलक

शिविर की खासियत मेहंदी की कलाकृतियों में भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जुड़े प्रतीकों का समावेश रहा। विद्यार्थियों ने शंख, कलश, करवा, अर्घ्य देती नारी, चंद्रमा और स्वस्तिक जैसे शुभ प्रतीकों को आकर्षक ढंग से उकेरा। इन पारंपरिक रूपांकनों ने मेहंदी को केवल शृंगार तक सीमित न रखते हुए भारतीय आस्था, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की कलात्मक अभिव्यक्ति बना दिया।

करवा चौथ पर बाजारों में मेहंदी लगवाने के लिए होने वाली भीड़ और लंबी प्रतीक्षा के बीच शिविर ने महिलाओं को अपने कार्यस्थल पर ही सुविधाजनक ढंग से और अपेक्षाकृत कम खर्च में मेहंदी लगवाने का अवसर दिया। महिलाओं ने इस पहल की सराहना करते हुए विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं और शगुन भी प्रदान किया। इससे विद्यार्थियों को आर्थिक लाभ के साथ अपने हुनर पर भरोसा बढ़ाने तथा भविष्य में रोजगार के अवसर तलाशने की प्रेरणा मिली।

पारंपरिक कला को रोजगार से जोड़ने पर जोर

ललित कला संस्थान की उपनिदेशक प्रो. अलका तिवारी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में मेहंदी केवल शृंगार का माध्यम नहीं, बल्कि समृद्ध लोक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। संस्थान का उद्देश्य पारंपरिक कलाओं को प्रोत्साहित करने के साथ विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण और रोजगारपरक गतिविधियों से जोड़ना है।

उन्होंने कहा कि ‘लर्न टू अर्न’ जैसी पहल विद्यार्थियों को अपनी कला का व्यावसायिक उपयोग करना सिखाती है। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे अपने कौशल के माध्यम से आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। ललित कला संस्थान, राज्य ललित कला अकादमी उत्तर प्रदेश और महिला अध्ययन केंद्र के संयुक्त प्रयास पारंपरिक कलाओं के प्रचार-प्रसार एवं संरक्षण को भी प्रोत्साहित करते हैं।

हर प्रमुख त्योहार पर आयोजन की मांग

शिविर में शामिल महिलाओं ने आयोजन की सराहना करते हुए सुझाव दिया कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़े ऐसे कार्यक्रम प्रत्येक प्रमुख भारतीय त्योहार पर प्रतिवर्ष आयोजित किए जाएं। इससे पारंपरिक कलाओं को बढ़ावा मिलने के साथ विद्यार्थियों को अपने हुनर के प्रदर्शन और कमाई के अधिक अवसर मिल सकेंगे।

कार्यक्रम के आयोजन में डॉ. शालिनी धामा, डॉ. पुनवासी, दीपांजलि और कृतिका का विशेष योगदान रहा। विश्वविद्यालय के प्रेस प्रवक्ता डॉ. मितेंद्र गुप्ता ने भी व्यवस्थाओं में सहयोग प्रदान किया।

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