स्टाम्प कानून पर चक्रपाणि दत्त मिश्र की पुस्तक का भव्य विमोचन
1200 पृष्ठों की पुस्तक में 101 केस स्टडीज, व्यावहारिक समस्याओं और उनके समाधान का समावेश
इंदौर। जिला पंजीयक एवं स्टाम्प कलेक्टर चक्रपाणि दत्त मिश्र द्वारा लिखित पुस्तक ‘कमेंट्री ऑन इंडियन स्टाम्प एक्ट, 1899 (एज एप्लीकेबल टू द स्टेट ऑफ एम.पी.)’ का इंदौर में आयोजित समारोह में भव्य विमोचन किया गया। खेत्रपाल लॉ हाउस, इंदौर द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक स्टाम्प कानून एवं प्रशासनिक क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों, अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों, विधि विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए उपयोगी संदर्भ ग्रंथ के रूप में प्रस्तुत की गई है।
समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। बेबी अलायना ने गणेश वंदना और आकांक्षा जाचक शेट्टी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। अतिथियों एवं उपस्थित प्रशासनिक-राजस्व अधिकारियों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं तथा सर्विस प्रोवाइडर्स का स्वागत इंदौर परिक्षेत्र के डीआईजी रजिस्ट्रेशन उमाशंकर बाजपेयी ने किया। उन्होंने कहा कि लेखक ने पद पर रहते हुए अपने अनुभवों के आधार पर यह कमेंट्री तैयार की है, जो व्यापक स्तर पर उपयोगी साबित होगी। इसके बाद अतिथियों ने मंच पर बनी आदमकद पुस्तक का पर्दा हटाकर औपचारिक अनावरण किया।
पुस्तक के लेखक चक्रपाणि दत्त मिश्र ने बताया कि मध्यप्रदेश में ‘संपदा परियोजना’ के माध्यम से कागजरहित कार्यप्रणाली को बढ़ावा दिया जा रहा है और त्वरित पीडीएफ उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने कहा कि विधिक विवेक, स्वांतःसुखाय और समाज-सुखाय की भावना से 1200 पृष्ठों की इस पुस्तक की रचना की गई है। पुस्तक में 101 केस स्टडीज के साथ स्टाम्प कानून से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं और उनके समाधान को शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि अधिनियम और न्यायिक निर्णयों की कठिन शब्दावली के बीच सेतु बनाने के उद्देश्य से पुस्तक लिखी गई है, ताकि लोक प्राधिकारी, अधिवक्ता, न्यायाधीश, विधि विद्यार्थी और आम नागरिक स्टाम्प कानून को सरलता से समझ सकें।
समारोह के गेस्ट ऑफ ऑनर इंदौर संभागायुक्त भास्कर लक्षकार ने कहा कि पद पर रहते हुए पुस्तक लिखना बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक प्रशासनिक स्तर के साथ-साथ आम जनता के सामने आने वाली स्टाम्प ड्यूटी संबंधी कठिनाइयों के समाधान में सहायक होगी और स्टाम्प शुल्क की प्रभार्यता को लेकर उत्पन्न दुविधाओं में प्रभावी मार्गदर्शन प्रदान करेगी।
पुस्तक पर चर्चा करते हुए जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान ने इसे विधि के क्षेत्र में ‘मील का पत्थर’ बताया। पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता मनोज द्विवेदी ने कहा कि अनुभव आधारित यह पुस्तक लिटिगेशन कम करने तथा स्टाम्प ड्यूटी एवं रजिस्ट्रेशन से संबंधित समस्याओं के समाधान में कारगर साबित हो सकती है।
भोपाल से पहुंचे वरिष्ठ जिला पंजीयक एवं संपदा परियोजना अधिकारी स्वप्नेश शर्मा ने कहा कि इंदौर जिला प्रदेश के राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान देता है। उन्होंने कहा कि चक्रपाणि दत्त मिश्र के तीन दशक के अनुभवों से तैयार यह पुस्तक राज्य की अर्थव्यवस्था और टैक्स कलेक्शन से जुड़े कार्यों में भी उपयोगी सिद्ध हो सकती है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार माहेश्वरी ने 1200 पृष्ठों की पुस्तक को प्रशासनिक एवं कानूनी संदर्भों के लिए उपयोगी ग्रंथ बताया। उन्होंने भविष्य में इसी विषय पर एक संक्षिप्त ‘लघु रिफरेंस बुक’ तैयार करने का सुझाव भी दिया।
कार्यक्रम का संचालन प्रसिद्ध कवयित्री एवं शिक्षिका प्रीति दुबे तथा वरिष्ठ जिला पंजीयक एवं स्टाम्प कलेक्टर डॉ. अमरेश नायडू ने किया। अतिथियों का स्वागत कनिष्क मिश्र, डॉ. अंजना चक्रपाणि मिश्र, सिद्धार्थ मिश्र, इंदू मिश्र, डॉ. पीयूष मिश्र, निष्ठा मिश्र, आकांक्षा जाचक शेट्टी एवं नीतेश शेट्टी ने किया। अंत में डॉ. अंजना चक्रपाणि मिश्र ने आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रशासनिक एवं पंजीयन अधिकारियों, अधिवक्ताओं, इष्ट-मित्रों और शुभचिंतकों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की।


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