पूर्ति निरीक्षक की तैनाती पर विवाद, 100 से अधिक राशन डीलरों ने दी सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी
भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग, सदर तहसील में तैनाती का विरोध
मुजफ्फरनगर। पूर्ति निरीक्षक आशीष श्रीवास्तव की तैनाती को लेकर जिले में विवाद खड़ा हो गया है। उचित दर विक्रेताओं ने उन्हें तहसील सदर क्षेत्र में तैनात किए जाने का विरोध करते हुए जिला पूर्ति अधिकारी को शिकायती प्रार्थना पत्र सौंपा है। राशन डीलरों ने अधिकारी पर भ्रष्टाचार और राशन वितरण में अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए लंबित शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें सदर तहसील क्षेत्र में तैनात किया गया तो 100 से अधिक राशन विक्रेता सामूहिक इस्तीफा देने के लिए बाध्य होंगे।
जांच लंबित होने का दावा
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि आशीष श्रीवास्तव की पूर्व में तहसील सदर और नगर क्षेत्र स्थित एरिया ऑफिस में तैनाती के दौरान राशन विक्रेताओं को परेशान किया जाता था। आरोप है कि दुकानों की जांच के नाम पर दबाव बनाया जाता था और कथित तौर पर हर महीने तीन से चार हजार रुपये की मांग की जाती थी। शिकायत पत्र में एफआईआर दर्ज कराने और दुकान निरस्त कराने की धमकी देकर 50 हजार से एक लाख रुपये तक की कथित रिश्वत मांगने के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
राशन विक्रेताओं का दावा है कि अधिकारी के विरुद्ध जिला और मंडल स्तर पर पहले भी शिकायतें की गई थीं। कुछ विक्रेताओं के शपथपत्र और बयान संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किए जाने का भी उल्लेख किया गया है। शिकायत पत्र के अनुसार, मामले की जांच सहारनपुर मंडल के संयुक्त आयुक्त खाद्य के स्तर पर लंबित है। शिकायतकर्ताओं ने आशंका जताई है कि सदर क्षेत्र में दोबारा तैनाती होने से जांच प्रभावित हो सकती है।
आंगनबाड़ी के खाद्यान्न वितरण पर भी सवाल
शिकायत में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और गर्भवती महिलाओं को वितरित किए जाने वाले खाद्यान्न को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं। विक्रेताओं का कहना है कि खाद्यान्न की आपूर्ति के दौरान कथित रूप से एक-दो बोरी कम लेने के लिए दबाव बनाया जाता था। ऐसा नहीं करने पर कार्रवाई की धमकी दिए जाने का आरोप भी लगाया गया है। राशन विक्रेताओं ने इस मामले की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
खतौला गांव के राशन वितरण मामले का किया उल्लेख
शिकायतकर्ताओं ने ग्राम खतौला में राशन वितरण से जुड़े जनवरी 2025 के एक मामले का हवाला देते हुए जांच और विभागीय कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। प्रार्थना पत्र के मुताबिक, पूर्व उचित दर विक्रेता तनु, पत्नी अनिल कुमार, के विरुद्ध शिकायत मिलने पर जांच की गई थी। इसमें गांव के करीब 200 राशन कार्डधारकों के बयान लिए जाने और लगभग 190 कार्डधारकों द्वारा दिसंबर 2024 तथा जनवरी 2025 में राशन नहीं मिलने की शिकायत किए जाने का दावा किया गया है।
शिकायत पत्र में बताया गया है कि चार फरवरी 2025 को तनु की दुकान को ग्राम कुटबी की उचित दर विक्रेता कमलेश देवी की दुकान से संबद्ध किया गया था। इसके बाद पांच फरवरी को दुकान सील किए जाने और छह फरवरी को सील हटाए जाने का उल्लेख है। छह फरवरी की हस्तांतरण रिपोर्ट का हवाला देते हुए दुकान में गेहूं का स्टॉक छह क्विंटल 19 किलोग्राम और चावल का स्टॉक नौ क्विंटल चार किलोग्राम दर्ज होने की बात कही गई है।
खाद्यान्न आवंटन की जानकारी नहीं मिलने का आरोप
शिकायत में कमलेश देवी की ओर से फरवरी 2025 में ग्राम खतौला के लिए आवंटित खाद्यान्न और स्टॉक हस्तांतरण से संबंधित जानकारी नहीं मिलने का भी आरोप लगाया गया है। प्रार्थना पत्र के अनुसार, इस संबंध में कई बार आवेदन दिए गए और सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत भी जानकारी मांगी गई। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि मांगी गई सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई तथा इस मामले में संयुक्त आयुक्त खाद्य, सहारनपुर मंडल के समक्ष अपील लंबित है।
तैनाती रोकने और निष्पक्ष जांच की मांग
उचित दर विक्रेताओं ने जिला पूर्ति अधिकारी से मांग की है कि लंबित शिकायतों की निष्पक्ष जांच पूरी होने तक आशीष श्रीवास्तव को तहसील सदर क्षेत्र में तैनात न किया जाए। उन्होंने संबंधित अभिलेखों और साक्ष्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की है। राशन विक्रेताओं ने चेतावनी दी है कि उनकी मांगों पर विचार नहीं होने और अधिकारी की सदर क्षेत्र में तैनाती किए जाने की स्थिति में 100 से अधिक विक्रेता सामूहिक इस्तीफा दे सकते हैं।
फिलहाल, शिकायत पत्र में लगाए गए आरोपों पर संबंधित पूर्ति निरीक्षक का पक्ष उपलब्ध नहीं है। आरोपों की सत्यता और विभागीय कार्रवाई की स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।


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