ईमानदार पहल जरूरी
 इलमा अज़ीम 
भ्रष्टाचार का वायरस व्यवस्था की रगों में बुरी तरह से घर कर गया है। हालात यह बन गए हैं कि भ्रष्टाचार की कमाई के लिए भी बाकायदा सिंडिकेट रूप में काम किया जा रहा है। यह स्थिति हमारे समाज में व्यवस्था की सड़न को तो दर्शाता ही है, साथ ही भ्रष्टाचारियों के दुस्साहस को भी सामने लाता है। हम जानते हैं कि हमारी व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार समाज को दीमक की तरह खोखला कर रहा है। तमाम अंतर्राष्ट्रीय सर्वेक्षणों में भ्रष्टाचार की वैश्विक सूची में हमारी स्थिति शर्मसार करने वाली है। 

लेकिन भ्रष्टाचार को लेकर हमारी उदासीनता दुर्भाग्यपूर्ण है, सरकारों के स्तर पर भी और समाज के भी। बहरहाल, उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर की नगर परिषद के पार्षदों द्वारा हाथ में जल लेकर ऊपरी कमाई को ईमानदारी से बांटने की खबर परेशान करती है। यह घटना सवाल उठाती है कि नगर निगमों की जो बदहाली है उसके मूल में क्या यह निगम की आय की बंदरबांट ही है?  आज भारत जैसे सोने की चिड़िया कहलाने वाले देश में भ्रष्टाचार अपनी जड़े फैला रहा है। आज भारत में ऐसे कई व्यक्ति मौजूद हैं जो भ्रष्टाचारी है। 

आज पूरी दुनिया में भारत भ्रष्टाचार के मामले में 94वें स्थान पर है। भ्रष्टाचार के कई रंग-रूप है जैसे रिश्वत, काला-बाजारी, जान-बूझकर दाम बढ़ाना, पैसा लेकर काम करना, सस्ता सामान लाकर महंगा बेचना आदि। भ्रष्टाचार के कई कारण हैं।  भ्रष्टाचार में मुख्य घूस यानी रिश्वत, चुनाव में धांधली, ब्लैकमेल करना, टैक्स चोरी, झूठी गवाही, झूठा मुकदमा, परीक्षा में नकल, परीक्षार्थी का गलत मूल्यांकन, हफ्ता वसूली, जबरन चंदा लेना, न्यायाधीशों द्वारा पक्षपातपूर्ण निर्णय, पैसे लेकर वोट देना, वोट के लिए पैसा और शराब आदि बांटना, पैसे लेकर रिपोर्ट छापना, अपने कार्यों को करवाने के लिए नकद राशि देना यह सब भ्रष्टाचार ही है। 

भ्रष्टाचार एक बीमारी की तरह है। आज भारत देश में भ्रष्टाचार तेजी से बढ़ रहा है। इसकी जड़े तेजी से फैल रही है। यदि समय रहते इसे नहीं रोका गया तो यह पूरे देश को अपनी चपेट में ले लेगा। भ्रष्टाचार का प्रभाव अत्यंत व्यापक है। समाज में विभिन्न स्तरों पर फैले भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कठोर दंड-व्यवस्था की जानी चाहिए। आज भ्रष्टाचार की स्थिति यह है कि व्यक्ति रिश्वत के मामले में पकड़ा जाता है और रिश्वत देकर ही छूट जाता है। जब तक भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रतिरोध के सुर प्रबल नहीं होते हमारे समाज में यह संकट बना रहेगा।

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