सीसीएसयू के शिक्षकों ने विकसित किया मानकीकृत ‘रिसर्च कल्चर स्केल’
40 कथनों और सात आयामों पर आधारित उपकरण से उच्च शिक्षण संस्थानों में शोध संस्कृति का होगा वैज्ञानिक आकलन
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू), मेरठ के शिक्षा विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जितेंद्र सिंह गोयल और प्रो. अरुण कुमार ने उच्च शिक्षण संस्थानों में शोध संस्कृति के आकलन के लिए मानकीकृत ‘रिसर्च कल्चर स्केल’ (आरसीएस) विकसित किया है। यह मापन उपकरण विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शोध से जुड़ी संस्थागत व्यवस्थाओं, संसाधनों, मार्गदर्शन, सहयोग और शोध-अनुकूल वातावरण का वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित मूल्यांकन करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
वर्तमान समय में उच्च शिक्षा संस्थानों में शोध की गुणवत्ता, नवाचार, अकादमिक सहयोग और शोध क्षमता के विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है। शोध संस्कृति का आकलन केवल शोध प्रकाशनों या परियोजनाओं की संख्या के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए संस्थागत सहयोग, वित्तीय सहायता, कार्य परिस्थितियों, शोध अवसंरचना और प्रभावी मार्गदर्शन जैसे पहलुओं को समझना भी जरूरी है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए इस स्केल का विकास किया गया है।
सात प्रमुख आयामों में बांटे गए 40 कथन
रिसर्च कल्चर स्केल में कुल 40 कथन शामिल हैं, जिन्हें सात प्रमुख आयामों में विभाजित किया गया है। इनमें वित्तपोषण एवं अनुदान सहायता प्रणाली, उद्योग-अकादमिक सहयोग, कार्य परिस्थितियां, शोध साझाकरण एवं सहयोग, शोध अवसंरचना, संस्थागत नीतियां तथा शोध मार्गदर्शन एवं क्षमता निर्माण शामिल हैं।
इन सात आयामों के माध्यम से किसी संस्थान में शोध से जुड़ी सुविधाओं, नीतियों, सहयोग और कार्य वातावरण के विभिन्न पहलुओं का समग्र आकलन किया जा सकता है। यह उपकरण शोधकर्ताओं को संस्थागत शोध वातावरण की विशेषताओं, उपलब्ध सहयोग और शोध कार्य को प्रभावित करने वाली परिस्थितियों को व्यवस्थित रूप से समझने में मदद कर सकता है।
विद्यार्थियों से लेकर शोध पर्यवेक्षकों तक के लिए उपयोगी
यह मानकीकृत स्केल स्नातकोत्तर विद्यार्थियों, शोधार्थियों, संकाय सदस्यों और उच्च शिक्षा से जुड़े अकादमिक शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी हो सकता है। शोध संस्कृति, संस्थागत सहयोग, शोध संसाधनों, मार्गदर्शन व्यवस्था और अकादमिक सहभागिता से संबंधित अध्ययनों में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। शोध पर्यवेक्षक, अकादमिक प्रशासक और उच्च शिक्षण संस्थान भी इसके माध्यम से अपने शोध वातावरण के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर सकते हैं।
स्केल से प्राप्त आंकड़े संस्थानों में शोध सहायता प्रणाली को समझने, क्षमता निर्माण की जरूरतों की पहचान करने और शोध-अनुकूल वातावरण विकसित करने के लिए साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में योगदान दे सकते हैं।
शोध-अनुकूल वातावरण को मजबूत करने की पहल
रिसर्च कल्चर स्केल का प्रमुख उद्देश्य शोध संस्कृति को केवल शोध परिणामों तक सीमित न रखकर उन संस्थागत परिस्थितियों का भी आकलन करना है, जो शोध कार्य को प्रोत्साहित करती हैं। यह उपकरण शोध सहयोग बढ़ाने, संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, प्रभावी मार्गदर्शन और शोध क्षमता निर्माण से जुड़े अकादमिक अध्ययनों के लिए व्यवस्थित आधार प्रदान कर सकता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह गोयल और प्रो. अरुण कुमार की यह पहल उच्च शिक्षा संस्थानों में शोध संस्कृति के वैज्ञानिक अध्ययन और शोध-अनुकूल वातावरण को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


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