2047 के विकसित भारत के निर्माण में विधि विद्यार्थी निभाएं नेतृत्व की भूमिका : जिला जज

विधि विद्यार्थियों के लिए कानून की पुस्तकें ही धर्मग्रंथ

मेरठ। मेरठ कॉलेज के विधि विभाग में एलएलबी प्रथम वर्ष के नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए सोमवार को दीक्षारंभ समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। मुख्य अतिथि जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा सहित प्रबंध समिति के अध्यक्ष डॉ. ओपी अग्रवाल, सचिव विवेक गर्ग, प्राचार्य प्रो. नीरज कुमार एवं विभागाध्यक्ष प्रो. प्रवीण दुबलिश का पौधा एवं स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया गया।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने कहा कि विधि विद्यार्थियों के लिए कानून की पुस्तकें ही धर्मग्रंथ हैं। विद्यार्थियों को कानून की धाराओं और प्रावधानों के साथ संविधान की मूल भावना, न्याय के सिद्धांतों तथा समाज के प्रति अपने दायित्वों को भी समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था में लोगों का विश्वास बनाए रखने में विधि विद्यार्थियों और भावी विधिवेत्ताओं के चरित्र एवं आचरण की महत्वपूर्ण भूमिका है।

उन्होंने कहा कि कानून ने अव्यवस्थित समाज को व्यवस्थित कर महान देशों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विधि विद्यार्थी भविष्य के न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता और विधि विशेषज्ञ हैं। इसलिए उन्हें ईमानदारी, अनुशासन, कड़ी मेहनत और निरंतर अध्ययन को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि लगन और मनोयोग से मेहनत करने पर प्रगति करने से कोई नहीं रोक सकता। वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में युवा विधि विद्यार्थियों को नेतृत्व की भूमिका निभानी होगी।

प्रबंध समिति के सचिव विवेक गर्ग ने कहा कि विधि का क्षेत्र व्यापक और चुनौतीपूर्ण होने के साथ रोजगार एवं करियर की अनेक संभावनाओं से भरा है। विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन के साथ नवीनतम विधिक जानकारी से स्वयं को अपडेट रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि मेरठ कॉलेज विद्यार्थियों के शैक्षणिक एवं सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है।

अध्यक्ष डॉ. ओपी अग्रवाल ने कहा कि विधि शिक्षा केवल कानून की धाराओं और प्रावधानों का अध्ययन नहीं है, बल्कि समाज में न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों की स्थापना का माध्यम है। प्राचार्य प्रो. नीरज कुमार ने विद्यार्थियों को महाविद्यालय की गरिमामयी परंपराओं, अनुशासन और शैक्षणिक उत्कृष्टता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।

विभागाध्यक्ष प्रो. प्रवीण दुबलिश ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि विभाग द्वारा मूट कोर्ट, विधिक जागरूकता, शोध एवं अन्य अकादमिक गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभा विकसित करने के अवसर दिए जाएंगे। कार्यक्रम का संचालन प्रो. आरके उपाध्याय ने किया। उन्होंने कहा कि विधि की शिक्षा केवल करियर नहीं, बल्कि न्याय, संविधान, अधिकार और कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता की यात्रा है। अंत में प्रो. एमपी वर्मा ने आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

समारोह में पूर्व प्राचार्या प्रो. अंजलि मित्तल, पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. केके मित्तल, प्रो. चंद्रशेखर भारद्वाज सहित अनेक शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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