जेल में करवाचौथ मनाने की तैयारी, मुस्कान-रविता ने मांगी लाल चूड़ियां और बिंदी
मेरठ जिला जेल में महिला बंदियों को पूजा और श्रृंगार का सामान देगी संजीवनी महिला संस्था, व्रत रखने की अनुमति जेल मैनुअल के अनुसार
मेरठ। जिला जेल में बंद मुस्कान और रविता ने करवाचौथ के लिए लाल चूड़ियां, बिंदी और श्रृंगार का सामान मांगा है। संजीवनी महिला संस्था की ओर से उनकी मांग के अनुसार पूजा सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। संस्था की टीम करवाचौथ से पहले महिला बंदियों को मिट्टी के करवे और श्रृंगार का सामान बांट रही है। हालांकि, दोनों महिलाएं व्रत रखेंगी या नहीं, इसकी पुष्टि संस्था की ओर से नहीं की गई है।
संस्था की टीम ने जेल पहुंचकर बांटी सामग्री
संजीवनी महिला संस्था की निशी जैन सोमवार को अपनी टीम के साथ जिला जेल पहुंचीं। संस्था की ओर से महिला बंदियों को करवाचौथ की पूजा के लिए मिट्टी के करवे और श्रृंगार का सामान दिया जा रहा है। इस दौरान बंदियों से उनकी जरूरतों के बारे में भी पूछा गया। निशी जैन के मुताबिक, मुस्कान और रविता ने चूड़ी-बिंदी समेत श्रृंगार की सामग्री मांगी है। संस्था उनकी मांग के अनुसार सामान उपलब्ध करा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों व्रत रखेंगी या किसके लिए पूजा करेंगी, इस बारे में उन्हें जानकारी नहीं है।
महिला बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने में जुटी संस्था
निशी जैन ने बताया कि संजीवनी महिला संस्था लंबे समय से जेल में सामाजिक कार्य कर रही है। संस्था महिला बंदियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण देने के साथ उनके बच्चों की पढ़ाई और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी काम करती है। करवाचौथ के अवसर पर महिला बंदियों को पूजा और श्रृंगार की सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि वे अपनी इच्छा के अनुसार त्योहार मना सकें।
जेल मैनुअल के अनुसार व्रत और पूजा की अनुमति
वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने बताया कि जेल में बंद महिलाएं अपनी इच्छा से करवाचौथ का व्रत रख सकती हैं। जेल मैनुअल के अनुसार पूजा और फलाहार की व्यवस्था की जाती है। पति-पत्नी दोनों जेल में बंद हों तो नियमानुसार मुलाकात कराई जा सकती है। बाहर रहने वाले पति से मिलने के लिए भी निर्धारित नियमों के तहत व्यवस्था होती है।
पति की तस्वीर रखकर भी करती हैं पूजा
जेल अधीक्षक के मुताबिक, जिन महिला बंदियों के पति दूसरे शहरों में रहते हैं, उनमें से कुछ पति की तस्वीर या उनकी किसी निशानी को सामने रखकर पूजा करती हैं। वहीं, जिन मामलों में संबंधित महिला और पुरुष के बीच पति-पत्नी का संबंध नहीं है, वहां नियमों के अनुसार मुलाकात की अनुमति नहीं दी जाती। जेल प्रशासन का कहना है कि व्रत और पूजा की व्यवस्था नियमों के दायरे में की जाती है।


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