वृक्ष प्रकृति की जीवित पूंजी हैं: प्रो. विमला वाई.
विश्वविद्यालय परिसर में रोपे गए नीम के पौधे
सहारनपुर। माँ शाकुम्भरी विश्वविद्यालय सहारनपुर की कुलपति प्रो.विमला वाई.ने कहा कि विश्वविद्यालय को केवल शिक्षा का केंद्र ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संराक्षण और सतत विकास की संस्कृति का संवाहक भी होना चाहिए। हम आदिकाल से प्रकृति के संरक्षण हेतु सतत प्रयत्नशील रहे हैं। हमारी संस्कृति में प्रकृति की पूजा-अर्चना की व्यवस्था थी। हमारे जीवन का एक काल वानप्रस्थ है, जो अरण्य संस्कृति के साथ ही व्यतीत होता है। वृक्ष प्रकृति की जीवित पूंजी है, इसका संरक्षण हम सभी का सामूहिक दायित्व है।
विश्वविद्यालय में महामहिम राज्यपाल द्वारा नामित नए कार्यपरिषद सदस्यों के साथ पहली बैठक थी। पर्यावरण स्नेही और राज्यपाल द्वारा नामित कार्य परिषद सदस्य डॉ.ओ.पी.चौधरी ने विश्वविद्यालय परिसर में वृक्षारोपण करने हेतु पहले से ही आग्रह कर रखा था, उसी क्रम में आज बैठक से पूर्व कुलपति प्रो.विमला वाई., महामहिम राज्यपाल द्वारा नियुक्त कार्यपरिषद सदस्यगण-न्यायमूर्ति सतीश चंद्रा, प्रो.राजेन्द्र सिंह पुंढीर, प्रो.किरन साहू, प्रो.ओम प्रकाश चौधरी एवं कुलसचिव श्री कमल कृष्ण, डॉ. संदीप कुमार, राजन लांबा आदि के साथ मिलकर विश्वविद्यालय अभियंता इंजी.विवेक सिंह पुंडीर की देखरेख में नीम के 4 पौधे परिसर में रोपित किये गये।
डॉ.चौधरी ने कहा कि आज लगाया गया प्रत्येक पौधा आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ पर्यावरण और स्वस्थ जीवन का आधार बनेगा। उन्होंने कहा कि प्रकृति संरक्षित है तो हम सुरक्षित हैं। नीम का वृक्ष गर्म और शुष्क परिस्थितियों में भी बढ़ते हुए हरा-भरा रह सकता है। भारतीय संस्कृति और लोकजीवन में नीम वृक्ष का विशेष महत्व रहा है।इसके औषधीय गुण मानव, पशु व कृषि के लिए सर्वविदित हैं। प्रो.चौधरी ने विश्वविद्यालय को हरित, नवाचार, अनुसंधान-उन्मुख, भारतीय ज्ञान परम्परा के अनुरूप आदर्श परिसर के रूप में विकसित करने का संकल्प दुहराया।


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