डिजिटल अरेस्ट से गेमिंग फ्रॉड तक, सीसीएसयू में विद्यार्थियों को साइबर ठगी से बचाव के गुर बताए

पुलिस अधिकारियों ने फर्जी निवेश, साइबर स्लेवरी और सोशल मीडिया धोखाधड़ी के प्रति किया जागरूक, ठगी होने पर 1930 पर कॉल करने की सलाह

मेरठ, 29 अक्टूबर। डिजिटल सुविधाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधों के तरीके भी बदल रहे हैं। कभी पुलिस अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया जाता है, तो कभी ऑनलाइन गेमिंग, फर्जी निवेश और विदेश में नौकरी का लालच देकर लोगों को ठगी का शिकार बनाया जाता है। इन अपराधों से बचाव के लिए चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) में साइबर सुरक्षा एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विद्यार्थियों को साइबर अपराधों की पहचान, ऑनलाइन सुरक्षा और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई।

उत्तर प्रदेश पुलिस के साइबर जागरूकता अभियान के तहत विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज (आईएलएस) और सर छोटू राम इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (एससीआरआईईटी) के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम हुआ। कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में विधि और तकनीकी संकायों के विद्यार्थियों को डिजिटल गोपनीयता, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और साइबर अपराधों के बदलते तरीकों के प्रति सतर्क किया गया।

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डरें नहीं

उपनिरीक्षक नितिन पांडेय और आकाश कुमार ने बताया कि साइबर ठग खुद को पुलिस या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं। इसके बाद जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी देने का दबाव बनाया जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से ऐसी कॉल आने पर घबराने के बजाय संबंधित विभाग से स्वतंत्र रूप से सत्यापन करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि अनजान लिंक खोलने, संदिग्ध क्यूआर कोड स्कैन करने और अनधिकृत एप डाउनलोड करने से आर्थिक नुकसान हो सकता है। किसी के साथ ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम कार्ड का सीवीवी या बैंकिंग पासवर्ड साझा नहीं करना चाहिए।

साइबर स्लेवरी और गेमिंग फ्रॉड से रहें सतर्क

सीओ सौम्या अस्थाना ने साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप के प्रति जागरूक रहने और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना अधिकारियों को देने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि विदेश में नौकरी, आकर्षक वेतन और आसान कमाई का लालच देकर लोगों को साइबर स्लेवरी के जाल में फंसाया जा सकता है। ऐसे मामलों में लोगों पर दबाव डालकर ऑनलाइन ठगी जैसी अवैध गतिविधियां कराई जा सकती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को नौकरी के प्रस्तावों, भर्ती एजेंसियों और विदेश भेजने के दावों की विश्वसनीयता जांचने की सलाह दी।

ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर मुफ्त कॉइन, बोनस, बड़े इनाम और गेमिंग अकाउंट अनलॉक करने का लालच देकर भी ठगी की जा सकती है। विद्यार्थियों को केवल आधिकारिक स्रोतों से एप डाउनलोड करने और गेमिंग अकाउंट की जानकारी अनजान लोगों से साझा नहीं करने के लिए कहा गया।

सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा करने से बचें

उपनिरीक्षक निर्मल सती ने सोशल मीडिया पर गोपनीयता बनाए रखने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि अनजान फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करना, संदिग्ध समूहों से जुड़ना और निजी तस्वीरें या दैनिक गतिविधियां सार्वजनिक करना जोखिम बढ़ा सकता है। संदिग्ध प्रोफाइल, लिंक और संदेशों से जुड़े डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने की जानकारी भी दी गई।

इंस्पेक्टर संजय पांडेय ने विद्यार्थियों से साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर पुलिस की मदद लेने की अपील की। उन्होंने बताया कि साइबर ठगी होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।

फर्जी निवेश और एआई से बने भ्रामक वीडियो से सावधान

छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. भूपेंद्र सिंह ने कहा कि साइबर अपराधी शुरुआत में छोटे निवेश पर लाभ दिखाकर लोगों का भरोसा जीतते हैं और बाद में बड़ी रकम निवेश करने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने किसी भी निवेश मंच की विश्वसनीयता जांचने और जल्दबाजी में वित्तीय निर्णय नहीं लेने की सलाह दी।

विश्वविद्यालय के कुलानुशासक प्रो. बीरपाल सिंह ने कहा कि साइबर जागरूकता को परिवार और समाज तक पहुंचाना भी जरूरी है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से तैयार किए जाने वाले भ्रामक वीडियो, आवाज की नकल और फर्जी प्रचार के प्रति सतर्क रहने की अपील की।

कार्यक्रम में आईएलएस के निदेशक डॉ. विवेक कुमार त्यागी और एससीआरआईईटी के निदेशक प्रो. नीरज सिंघल सहित शिक्षक एवं पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। आयोजन और समन्वय में डॉ. सुशील कुमार, डॉ. अर्पित छाबड़ा और इंजीनियर प्रवीण पवार ने सहयोग किया। अंत में डॉ. अर्पित छाबड़ा ने अतिथियों, पुलिस अधिकारियों, शिक्षकों और सहयोगियों का आभार जताया।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संदेश दिया गया कि डर के कारण पैसे ट्रांसफर न करें, लालच में आकर निवेश न करें और अपनी गोपनीय जानकारी साझा न करें। साइबर ठगी होने पर बिना देरी शिकायत दर्ज कराएं।

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