खादी महोत्सव में स्वदेशी का संदेश, कविताओं ने जगाया राष्ट्रप्रेम
एमआईईटी में स्टार्टअप प्रतियोगिता के विजेता सम्मानित, कवियों ने खादी, भारतीय संस्कृति, तिरंगे और उत्तर प्रदेश के हस्तशिल्प की महिमा का किया बखान
मेरठ। उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड, मेरठ मंडल की ओर से आयोजित मंडलीय खादी ग्रामोद्योग प्रदर्शनी एवं महोत्सव 2026-27 में शुक्रवार को स्टार्टअप प्रतियोगिता और स्वदेशी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रमों में नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहन देने के साथ खादी, स्वदेशी उत्पादों, भारतीय संस्कृति और राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया गया।
सुबह 10 बजे मेरठ इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (एमआईईटी) में पिच टैंक स्टार्टअप प्रतियोगिता आयोजित हुई। इसमें प्रतिभागियों ने अपने नवाचार और व्यावसायिक विचार प्रस्तुत किए। निर्णायक मंडल में एमआईईटी इनक्यूबेशन फोरम के सीईओ रेहान अहमद शामिल रहे। मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य डॉ. मनीषा अहलावत ने प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने युवाओं को नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
खादी के धागों में स्वाभिमान का संदेश
शाम पांच बजे कविशाला की ओर से स्वदेशी विषय पर कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। कवि श्री अंकुर मिश्रा ने अपनी रचना के माध्यम से खादी को गांधी के विचारों, देश के स्वाभिमान और कारीगरों के सम्मान से जोड़ा। उन्होंने कहा—
उन्होंने विदेशी चमक के बजाय स्वदेशी उत्पादों को पहचान बनाने और कपड़ा बुनने वाले कारीगरों को उचित सम्मान देने का संदेश दिया।
भारतीय संस्कृति और तिरंगे की महिमा का बखान
कवि संजय जैन सत्यम ने अपनी कविता में भारतीय संस्कृति की विविधता, खानपान, संगीत, पारिवारिक रिश्तों और धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं को प्रस्तुत किया। उन्होंने शंख की ध्वनि, श्रीकृष्ण की बांसुरी, मीरा की भक्ति, कबीर के दोहों और भारतीय संगीत परंपरा के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विरासत को रेखांकित किया।
तिरंगे की महत्ता बताते हुए उन्होंने उसे देश की पहचान, एकता और वीरों के बलिदान का प्रतीक बताया। उनकी पंक्तियों में तिरंगे के तीन रंगों के माध्यम से पूरे देश को एक सूत्र में बांधने का भाव दिखाई दिया।
कवि फ़हमी रज़ा ज़ैदी ने उत्तर प्रदेश के पारंपरिक वस्त्रों और हस्तशिल्प की विशेषताओं को अपनी रचना में पिरोया। उन्होंने बनारस की रेशमी साड़ियों, लखनऊ की चिकनकारी और भदोही के कालीनों का उल्लेख करते हुए प्रदेश की कला और शिल्प की वैश्विक पहचान को सामने रखा। उनकी पंक्तियां थीं—
कविशाला लैब्स प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ कुणाल मिश्रा ने कार्यक्रम का प्रबंधन किया। कवियों की रचनाओं ने श्रोताओं के सामने स्वदेशी, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय गौरव के विभिन्न पहलुओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
प्रदर्शनी में खादी उत्पादों के प्रति उत्साह
महोत्सव में आमजन की अच्छी आवाजाही रही। लोगों ने खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों में रुचि दिखाई, जिससे स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को अपने उत्पादों के प्रचार-प्रसार और बिक्री का अवसर मिला।
परिक्षेत्रीय ग्रामोद्योग अधिकारी माया चतुर्वेदी ने बताया कि महोत्सव का उद्देश्य खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना, स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को प्रोत्साहित करना, पारंपरिक कलाओं का संरक्षण करना और आमजन को स्वदेशी उत्पादों के प्रति जागरूक बनाना है। कार्यशालाओं और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से इन उद्देश्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है।



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