मेस चलाने से सब्जी बेचने तक...
पिता के त्याग से चमका नीरज का तीर, एशियन गेम्स में दो पदक जीतकर बढ़ाया मेरठ का मान
रिकर्व टीम में रजत और व्यक्तिगत स्पर्धा में कांस्य जीता; बेटे की सफलता पर मां परमशिला की आंखों से छलके खुशी के आंसू
मेरठ। एशियन गेम्स में मेरठ के खिलाड़ियों की शानदार सफलता का सिलसिला जारी है। एथलीट पारुल चौधरी के बाद अब तीरंदाज नीरज चौहान ने भी दो पदक जीतकर शहर का नाम रोशन किया है। नीरज ने पुरुष रिकर्व टीम स्पर्धा में रजत और व्यक्तिगत स्पर्धा में कांस्य पदक अपने नाम किया। बेटे की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर स्टेडियम के पीछे पीडब्ल्यूडी कॉलोनी में रह रहे उनके परिवार में खुशी का माहौल है। मां परमशिला की आंखें खुशी से नम हो गईं।
नीरज ने टीम स्पर्धा में धीरज और यशदीप के साथ हिस्सा लिया। भारतीय टीम को दक्षिण कोरिया के खिलाफ 1-5 से हार मिली और उसे रजत पदक से संतोष करना पड़ा। इसके बाद व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में नीरज ने धीरज बोम्मादेवरा को 6-4 से हराकर कांस्य पदक जीता। एशियन गेम्स के इतिहास में व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में पदक जीतने वाले वह दूसरे भारतीय पुरुष तीरंदाज हैं। इससे पहले 2010 में तरुणदीप राय ने रजत पदक जीता था।
चार साल की उम्र से खेल की राह पर बढ़े नीरज
नीरज का परिवार मूलरूप से गोरखपुर का रहने वाला है। उनके पिता अक्षय चौहान वर्ष 1990 में मेरठ आए थे। कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम में करीब 20 साल तक मेस चलाने वाले अक्षय ने चार साल की उम्र में ही बेटे को खेलों से जोड़ दिया था। नीरज ने स्टेडियम में कई खेलों में हाथ आजमाया, लेकिन बाद में तीरंदाजी को अपना लक्ष्य बनाया। कुछ वर्षों बाद उनका चयन सोनभद्र के तीरंदाजी हॉस्टल में हो गया। यहीं से उनकी सफलता का सफर आगे बढ़ता गया।
बेटे के सपने के लिए पिता ने सब्जी तक बेची
नीरज की मां परमशिला ने बताया कि उनके पति ने मेस चलाते हुए ही बेटों को खेलों में आगे बढ़ाने का फैसला किया था। कोरोना काल में मेस का काम छूट गया तो परिवार के सामने आर्थिक मुश्किलें आईं। इसके बावजूद अक्षय ने बच्चों की ट्रेनिंग और खेल का खर्च रोकने नहीं दिया। उन्होंने सब्जी तक बेचकर परिवार चलाया और बेटों के खेल करियर को आगे बढ़ाया।
नीरज ने भी मेहनत का फल लगातार हासिल किया। वर्ष 2018 में जूनियर नेशनल और 2021 में सीनियर नेशनल में रजत पदक जीता। खेल कोटे से आईटीबीपी में नौकरी हासिल की और वर्तमान में दिल्ली में तैनात हैं। नीरज के भाई सुनील भी बॉक्सर हैं और खेल कोटे से पीएसी में तैनात हैं। नीरज की एशियन गेम्स में दोहरी पदक जीत ने परिवार के वर्षों के संघर्ष और पिता के त्याग को गौरव में बदल दिया।

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