उल्देपुर की 150 से ज्यादा अवैध कॉलोनियों का खुलेगा कच्चा-चिट्ठा, मेडा के अफसर भी जांच के घेरे में
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सात सदस्यीय न्यायिक आयोग मेरठ पहुंचा, पूर्व न्यायाधीश सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में अधिकारियों से मंथन; पांच बिंदुओं पर होगी जांच
मेरठ। उल्देपुर में विकसित हुई अवैध कॉलोनियों और मेरठ में अवैध निर्माणों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित सात सदस्यीय न्यायिक आयोग गुरुवार को मेरठ पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में गठित आयोग ने सर्किट हाउस में मंडल और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक शुरू की। जांच के केंद्र में उल्देपुर की 150 से अधिक बताई जा रही अवैध कॉलोनियां हैं। आयोग यह भी जांच करेगा कि इन कॉलोनियों को विकसित होने से रोकने में मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) की भूमिका क्या रही और कहीं अधिकारियों की मिलीभगत तो नहीं थी।
सर्किट हाउस में अधिकारियों से की चर्चा
न्यायिक आयोग के मेरठ पहुंचने पर मंडलायुक्त भानुचंद्र गोस्वामी और जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह ने अध्यक्ष व सदस्यों का स्वागत किया। बैठक में एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति, मेडा उपाध्यक्ष संजय कुमार मीणा और नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव पी. गुरु प्रसाद समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में अवैध कॉलोनियों और अवैध निर्माण से जुड़े मामलों पर चर्चा की गई। बैठक के बाद आयोग के उल्देपुर में मौके पर जाकर निरीक्षण करने की भी संभावना है।
आयोग के आने से पहले मेडा ने शुरू की कार्रवाई
मेरठ में अवैध निर्माणों का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने के बाद 21 सितंबर 2026 को न्यायिक आयोग के गठन का आदेश दिया गया था। आयोग की जांच से पहले ही मेडा ने शहर में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी थी। मेडा सचिव बृजेश सिंह के अनुसार, प्राधिकरण को आयोग के संबंध में आधिकारिक जानकारी नहीं मिली थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया गया है। आयोग की कार्यवाही के लिए मेडा की ओर से कोषागार में 35 लाख रुपये का बजट भी उपलब्ध कराया गया था।
बिना मंजूरी और नक्शे के विकसित हुईं कॉलोनियां
उल्देपुर में निजी जमीन पर आवासीय कॉलोनियां विकसित किए जाने की बात सामने आई है। बताया गया है कि इन कॉलोनियों के लिए मेडा से अनुमति नहीं ली गई और न ही मानचित्र स्वीकृत कराया गया। इसके बावजूद भूखंड काटकर लोगों को बेचे गए। आयोग इन कॉलोनियों की जमीन के स्वामित्व, भूखंडों की खरीद-फरोख्त और निर्माण की प्रक्रिया की पड़ताल करेगा। साथ ही मेरठ में अन्य स्थानों पर हुए अवैध निर्माणों की स्थिति भी जांच के दायरे में रहेगी।
पांच अहम सवालों के जवाब तलाशेगा आयोग
न्यायिक आयोग की जांच के लिए पांच प्रमुख बिंदु निर्धारित किए गए हैं। इनमें सबसे पहले यह पता लगाया जाएगा कि अवैध आवासीय कॉलोनियां जिस जमीन पर विकसित हुईं, वह सरकारी है या निजी। यदि जमीन सरकारी नहीं है, तो उसके वैध मालिक कौन हैं और जमीन के मालिकों व खरीदारों के बीच लेन-देन किस तरह हुआ।
आयोग यह भी जांच करेगा कि मेरठ विकास प्राधिकरण पांच साल से अधिक समय तक निष्क्रिय क्यों रहा और उसकी जानकारी में अवैध कॉलोनियां कैसे विकसित होती रहीं। सबसे अहम सवाल यह है कि क्या इन कॉलोनियों को विकसित करने में मेडा के अधिकारियों की मिलीभगत या सांठगांठ थी। यदि ऐसा पाया जाता है, तो जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान भी जांच का हिस्सा होगी।
उल्देपुर में किसानों का धरना भी जारी
उल्देपुर में अवैध कॉलोनियों के मामले को लेकर किसान नेता विजय राघव अनिश्चितकालीन धरने को संबोधित कर चुके हैं। अब न्यायिक आयोग के मेरठ पहुंचने से इस प्रकरण की जांच तेज होने की उम्मीद है। आयोग की पड़ताल से जमीन के स्वामित्व, कॉलोनियों के विकास और संबंधित विभागों की भूमिका को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।



No comments:
Post a Comment