सीसीएसयू के प्रो. अनुज कुमार के शोध को 14.86 लाख की मंजूरी

सुपरकैपेसिटर के लिए विकसित होगा उन्नत नैनो-कंपोजिट पॉलिमर जेल इलेक्ट्रोलाइट; इलेक्ट्रिक वाहन और सौर-पवन ऊर्जा तकनीक को मिल सकता है लाभ

मेरठ । चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) के भौतिक विज्ञान विभाग के प्रोफेसर अनुज कुमार की शोध परियोजना को उत्तर प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (सीएसटीयूपी), लखनऊ ने 14.86 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की है। तीन वर्ष की इस परियोजना के तहत अगली पीढ़ी के सुपरकैपेसिटर के लिए हरित और टिकाऊ नैनो-कंपोजिट पॉलिमर जेल इलेक्ट्रोलाइट विकसित करने पर शोध किया जाएगा।

परियोजना में प्रो. अनुज कुमार मुख्य अन्वेषक, जबकि प्रो. बीरपाल सिंह और डॉ. योगेंद्र कुमार गौतम सह-अन्वेषक हैं। शोध का उद्देश्य ऐसी उन्नत सामग्री तैयार करना है, जो ऊर्जा भंडारण उपकरणों को अधिक प्रभावी, स्थिर और पर्यावरण के अनुकूल बनाने में मददगार हो सके।

तेजी से चार्ज और डिस्चार्ज होंगे उपकरण

सुपरकैपेसिटर आधुनिक ऊर्जा भंडारण तकनीक है। इसकी खासियत है कि यह बहुत कम समय में चार्ज और डिस्चार्ज हो सकता है तथा सामान्य बैटरियों की तुलना में अधिक चार्ज-डिस्चार्ज चक्र सहन कर सकता है। इलेक्ट्रिक वाहनों में अचानक अतिरिक्त ऊर्जा की जरूरत, ब्रेकिंग के दौरान ऊर्जा को दोबारा संग्रहित करने और सौर-पवन ऊर्जा प्रणालियों में बिजली के उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में इसका उपयोग संभावित है।

जेल इलेक्ट्रोलाइट पर होगा प्रयोग

शोध में पारंपरिक तरल इलेक्ट्रोलाइट के विकल्प के रूप में पॉलिमर जेल इलेक्ट्रोलाइट विकसित किया जाएगा। इसमें नैनो स्तर के विशेष पदार्थ मिलाकर विद्युत चालकता, तापीय स्थिरता, मजबूती और आयनिक परिवहन जैसे गुणों को बेहतर बनाने का प्रयास होगा। वैज्ञानिक तैयार सामग्री की चार्ज-डिस्चार्ज क्षमता, ऊर्जा घनत्व, पावर डेंसिटी और लंबे समय तक प्रदर्शन का परीक्षण करेंगे।

शोध के संभावित परिणाम भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों, स्मार्ट ऊर्जा प्रणालियों, सौर ऊर्जा संयंत्रों, पवन ऊर्जा परियोजनाओं और पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए उपयोगी हो सकते हैं।

कुलपति ने दी शोध टीम को बधाई

विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने शोध परियोजना की मंजूरी पर पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शोध, नवाचार और वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देना प्राथमिकताओं में शामिल है। इस तरह की परियोजनाओं से नए वैज्ञानिक विचारों को प्रयोगात्मक रूप देने के साथ शोधार्थियों को आधुनिक तकनीकों पर काम करने का अवसर मिलता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह परियोजना ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में उपयोगी शोध परिणाम देगी और विश्वविद्यालय की शोध गतिविधियों को नई दिशा प्रदान करेगी।

No comments:

Post a Comment

Popular Posts