यूएन में ईरान पर भिड़े अमेरिका-रूस-चीन, दो वीटो ने पलटा पूरा खेल
11 देशों ने अमेरिकी प्रस्ताव का किया समर्थन, रूस और चीन के विरोध से प्रतिबंधों की निगरानी करने वाले विशेषज्ञ पैनल का कार्यकाल बढ़ाने की कोशिश नाकाम
संयुक्त राष्ट्र। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका और रूस-चीन के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए। गुरुवार को अमेरिका के उस प्रस्ताव पर मतदान हुआ, जिसमें ईरान पर दोबारा लगाए गए संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों की निगरानी करने वाले विशेषज्ञों के पैनल का कार्यकाल आगे बढ़ाने की बात कही गई थी। प्रस्ताव के पक्ष में 11 देशों ने मतदान किया, जबकि रूस और चीन ने इसके खिलाफ वीटो कर दिया। पाकिस्तान और सोमालिया मतदान से दूर रहे। रूस और चीन के वीटो के कारण प्रस्ताव पारित नहीं हो सका।
प्रतिबंधों की निगरानी पर असर
संयुक्त राष्ट्र का विशेषज्ञ पैनल ईरान पर लागू प्रतिबंधों के पालन और संभावित उल्लंघनों से जुड़ी जानकारी जुटाने और उसकी जांच करने का काम करता है। यूएन के अनुसार मौजूदा पैनल का कार्यकाल 26 सितंबर 2026 तक है।
अमेरिका ने पैनल का कार्यकाल बढ़ाने को प्रतिबंधों की निगरानी जारी रखने के लिए जरूरी बताया। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि स्वतंत्र विशेषज्ञ प्रतिबंधों के उल्लंघन और प्रतिबंधों से बचने के प्रयासों की जानकारी सुरक्षा परिषद तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दूसरी ओर, रूस और चीन ने पश्चिमी देशों के रुख पर आपत्ति जताते हुए ईरान के परमाणु मुद्दे का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए करने पर जोर दिया।
रूस ने स्नैपबैक प्रतिबंधों पर उठाए सवाल
रूस ने ईरान पर दोबारा प्रतिबंध लागू करने की प्रक्रिया की वैधता पर ही सवाल उठाया है। मॉस्को का तर्क है कि जब प्रतिबंधों की वापसी को लेकर ही विवाद है, तो उसी व्यवस्था के तहत विशेषज्ञ पैनल का कार्यकाल बढ़ाने का अमेरिकी प्रस्ताव भी स्वीकार्य नहीं है। चीन ने भी ईरान के परमाणु मुद्दे पर राजनीतिक टकराव के बजाय बातचीत और तनाव कम करने की जरूरत बताई है।
ईरान के पास 60 फीसदी संवर्धित यूरेनियम
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता का एक बड़ा कारण उसका यूरेनियम भंडार है। संयुक्त राष्ट्र में हुई हालिया बहस में 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम के करीब 440 किलोग्राम भंडार का उल्लेख किया गया। आईएईए लंबे समय से ईरान के कुछ परमाणु भंडार और गतिविधियों पर अपनी निगरानी की निरंतरता को लेकर चिंता जता रहा है।
अब निगरानी के लिए वैकल्पिक रास्ते की तलाश
रूस और चीन के वीटो के बाद संयुक्त राष्ट्र के भीतर ईरान पर प्रतिबंधों की स्वतंत्र निगरानी को लेकर नया रास्ता तलाशना पड़ सकता है। पश्चिमी देशों के बीच इस बात पर चर्चा हो सकती है कि विशेषज्ञ पैनल के बजाय किसी अन्य व्यवस्था के जरिए प्रतिबंधों के संभावित उल्लंघनों पर नजर रखी जाए। इस घटनाक्रम ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा परिषद में अमेरिका और रूस-चीन के बीच गहरे मतभेद को एक बार फिर सामने ला दिया है।

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