मणिपुर में शांति की राह में नई दरारें, कुकी-ज़ो और नागा तनाव ने बढ़ाई चिंता

राजीव त्यागी 

मैतेई-कुकी संघर्ष के बाद अब कुकी-ज़ो और नागा समुदायों के बीच टकराव की आशंका; सरकार को निष्पक्ष संवाद और सख्त कदम उठाने की जरूरत

मई 2023 में भड़की जातीय हिंसा के बाद से मणिपुर में मैतेई और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच तनाव कम करने की कोशिशें धीरे-धीरे आगे बढ़ी हैं। हालांकि, अब कुकी-ज़ो और नागा समुदायों के बीच उभरते नए टकराव ने राज्य में शांति बहाली की प्रक्रिया के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। ऐसे में राज्य सरकार के लिए जरूरी है कि वह सभी समुदायों के प्रति निष्पक्षता बरतते हुए समय रहते प्रभावी कदम उठाए।

करीब एक वर्ष तक राष्ट्रपति शासन के बाद फरवरी 2026 में युमनाम खेमचंद सिंह के नेतृत्व में भाजपा सरकार के गठन के साथ राजनीतिक गतिविधियों को फिर गति मिली। इसके बाद मैतेई और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच रोजाना होने वाली हिंसा में कमी आने के संकेत मिले और सामान्य स्थिति बहाल करने के प्रयास तेज हुए। हालांकि, 2023 की हिंसा में विस्थापित हुए बड़ी संख्या में लोग अब भी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।

सूचना के अधिकार के तहत मिले एक जवाब में राहत शिविरों में 700 से अधिक लोगों की मौत का उल्लेख सामने आया है। इनमें कई मौतों के पीछे पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं और पोषण की कमी को कारण बताया गया है। यह स्थिति बताती है कि शांति प्रक्रिया केवल हिंसा रोकने तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि विस्थापित लोगों के पुनर्वास और बुनियादी सुविधाओं की बहाली भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

इस बीच 2 सितंबर को कुकी-ज़ो समुदाय के दो विधायकों का विधानसभा सत्र में शामिल होना राजनीतिक स्तर पर महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। जातीय हिंसा के शुरुआती दौर में इंफाल में हुए हमलों के बाद कुकी-ज़ो समुदाय के विधायकों ने विधानसभा सत्रों का बहिष्कार शुरू कर दिया था। ऐसे में उनकी विधानसभा में वापसी राजनीतिक संवाद को फिर से शुरू करने की दिशा में एक संकेत है।

इन विधायकों ने कुकी-ज़ो सिविल सोसाइटी संगठन ‘कुकी इनपी मणिपुर’ के उस निर्देश का पालन नहीं किया, जिसमें अलग प्रशासन की मांग पर रियायत मिलने तक विधानसभा का बहिष्कार जारी रखने की बात कही गई थी। उनकी वापसी से यह संकेत मिलता है कि समुदाय के भीतर भी राजनीतिक प्रक्रिया के जरिए आगे बढ़ने को लेकर अलग-अलग विचार मौजूद हैं।

मणिपुर में शांति बहाली के लिए अब सबसे बड़ी जरूरत यही है कि पुराने घावों को भरने के साथ नए सामुदायिक तनाव को फैलने से रोका जाए। कुकी-ज़ो और नागा समुदायों के बीच किसी भी टकराव को राजनीतिक या प्रशासनिक निष्क्रियता के कारण बढ़ने देना राज्य के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। सरकार को संवाद, निष्पक्ष प्रशासन, कानून-व्यवस्था और विस्थापित लोगों के पुनर्वास को प्राथमिकता देते हुए ऐसी परिस्थितियां बनानी होंगी, जिनमें सभी समुदाय राजनीतिक प्रक्रिया में भरोसे के साथ भाग ले सकें।

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