गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर का संदेश: शांति नहीं होगी तो समृद्धि भी नहीं हो सकती
न्यूयॉर्क में ‘द नेक्स्ट 3 बिलियन’ सम्मेलन में बोले गुरुदेव, आर्थिक विकास के साथ आंतरिक कल्याण और सामाजिक समावेशन पर दिया जोर
न्यूयॉर्क, 22 सितंबर। आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर ने मंगलवार को न्यूयॉर्क में आयोजित सेमाफोर के ‘द नेक्स्ट 3 बिलियन’ सम्मेलन को संबोधित किया। सम्मेलन में राष्ट्राध्यक्षों एवं शासनाध्यक्षों, वैश्विक संस्थानों और कारोबारी जगत के प्रमुख नेताओं ने हिस्सा लिया। चर्चा का केंद्र प्रौद्योगिकी और डिजिटल समावेशन के माध्यम से आर्थिक अवसरों के विस्तार पर रहा।
सम्मेलन में केन्या के राष्ट्रपति विलियम सामोई रुटो, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य की प्रधानमंत्री जूडिथ सुमिनवा, विश्व व्यापार संगठन की महानिदेशक डॉ. न्गोजी ओकोंजो-इवेला और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा सहित कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं।
सेमाफोर के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी जस्टिन बी. स्मिथ के साथ संवाद में गुरुदेव ने कहा कि आर्थिक विकास को आंतरिक कल्याण से अलग करके नहीं देखा जा सकता। अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस के एक दिन बाद उन्होंने कहा, “समृद्धि शांति के साथ आती है। यदि शांति नहीं होगी, तो समृद्धि भी नहीं हो सकती।”
उन्होंने कहा कि लगभग हर देश में संपन्न और वंचित वर्गों के बीच आर्थिक-सामाजिक खाई मौजूद है। इसे कम करने के लिए दोनों पक्षों को अपनी भूमिका निभानी होगी। गुरुदेव के अनुसार, लोगों को ‘पीड़ित मानसिकता’ से बाहर निकलकर अपने विकास की जिम्मेदारी उठानी चाहिए, जबकि संसाधन संपन्न वर्ग को सहानुभूति और साझा करने की भावना को बढ़ावा देना होगा।
बेरोजगार युवाओं का उदाहरण देकर समझाया उद्यमिता का महत्व
गुरुदेव ने भारत के एक ग्रामीण क्षेत्र में आर्ट ऑफ लिविंग केंद्र के आसपास रहने वाले 500 बेरोजगार युवाओं का उदाहरण साझा किया। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से दिए गए 200 परियोजना प्रस्तावों को युवाओं ने यह सोचकर ठुकरा दिया था कि कोई भी योजना सफल नहीं होगी। इसके बाद दो महीने के एक कार्यक्रम के जरिए उनमें उद्यमिता की भावना विकसित करने का प्रयास किया गया, जिससे उनकी सोच में बदलाव आया।
उन्होंने बताया कि इसी मॉडल को बाद में केन्या, घाना, नाइजीरिया, बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका और अफ्रीका के अन्य देशों में भी अपनाया गया। गुरुदेव ने भ्रष्टाचार को भी वैश्विक दक्षिण के कई देशों में विकास संसाधनों के जमीनी स्तर तक नहीं पहुंच पाने की एक प्रमुख वजह बताया।
तनाव और एआई पर भी रखी बात
कार्यस्थल के मुद्दों पर चर्चा करते हुए गुरुदेव ने कहा कि तनाव संवाद की प्रक्रिया को प्रभावित करता है और इसका असर कारोबारी संस्थानों पर भी पड़ता है। अनिश्चितता के दौर में बेहतर ढंग से आगे बढ़ने के लिए लोगों में अपनेपन और सुरक्षा की भावना होना जरूरी है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर सवाल पूछे जाने पर गुरुदेव ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “इंटेलिजेंस की अनुपस्थिति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एब्सोल्यूट इंटेलिजेंस—ये तीन अवस्थाएं हैं।” सत्र के समापन पर जस्टिन बी. स्मिथ ने कहा कि यदि उन्हें इन तीनों में से किसी एक को चुनना हो तो वे तीसरे विकल्प को चुनेंगे।
गुरुदेव ने चेतना के क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से ‘इंस्टीट्यूट ऑफ एब्सोल्यूट इंटेलिजेंस’ की भी स्थापना की है।

No comments:
Post a Comment