- गंगा पाण्डेय
युवा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं। उनके सपने, विचार और ऊर्जा ही देश के भविष्य की दिशा तय करते हैं। आज भारत विश्व का सबसे युवा देशों में से एक है, जहाँ बड़ी संख्या में युवा अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर देश को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का सपना देख रहे हैं। लेकिन वर्तमान समय में युवाओं के मन में एक प्रकार की बेचैनी, असंतोष और भविष्य को लेकर चिंता भी दिखाई देती है। यह बेचैनी केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों से भी जुड़ी हुई है। यदि इस ऊर्जा को सही दिशा मिले, तो यही बेचैनी देश में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बन सकती है।
आज का युवा पहले की तुलना में अधिक शिक्षित, जागरूक और तकनीकी रूप से सक्षम है। इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से वह पूरी दुनिया की जानकारी प्राप्त करता है। इसलिए उसकी अपेक्षाएँ भी बढ़ गई हैं। वह केवल आश्वासनों और वादों से संतुष्ट नहीं होता, बल्कि वास्तविक परिणाम चाहता है। बढ़ती बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताएँ, रोजगार के सीमित अवसर, महँगाई तथा शिक्षा और रोजगार के बीच बढ़ती दूरी युवाओं की चिंता का प्रमुख कारण हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद भी उचित रोजगार न मिलना उनके आत्मविश्वास को प्रभावित करता है। यही कारण है कि अनेक युवाओं में भविष्य को लेकर असुरक्षा की भावना उत्पन्न हो रही है।
आज का युवा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही चाहता है। वह चाहता है कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में पात्र लोगों तक पहुँचे और निर्णय लेने की प्रक्रिया निष्पक्ष हो। जब उसे भ्रष्टाचार, पक्षपात या प्रशासनिक लापरवाही दिखाई देती है, तो उसके मन में असंतोष उत्पन्न होता है। यह असंतोष केवल विरोध करने की भावना नहीं है, बल्कि व्यवस्था को बेहतर बनाने की इच्छा भी है। युवा चाहते हैं कि उनकी बात सुनी जाए और उन्हें केवल दर्शक नहीं, बल्कि निर्णय प्रक्रिया का सक्रिय भागीदार बनाया जाए।
लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब नागरिकों की सक्रिय भागीदारी हो। विशेष रूप से युवाओं की सहभागिता किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत होती है। आज युवा केवल मतदान तक सीमित नहीं रहना चाहते। वे नीति-निर्माण, सामाजिक अभियानों, स्थानीय विकास कार्यों और जनहित के निर्णयों में अपनी भूमिका निभाना चाहते हैं। यदि सरकार, प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व युवाओं को उचित अवसर दें, उनके सुझावों को महत्व दें तथा संवाद की संस्कृति विकसित करें, तो उनकी ऊर्जा समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।
आज का युवा योजनाओं और घोषणाओं से अधिक उनके वास्तविक क्रियान्वयन को महत्व देता है। वह देखना चाहता है कि रोजगार सृजन हो, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, उद्यमिता को प्रोत्साहन मिले और प्रतिभा के आधार पर अवसर उपलब्ध हों। युवा अब प्रतीकात्मक कार्यक्रमों से आगे बढ़कर ऐसे परिवर्तन चाहते हैं जो उनके जीवन में प्रत्यक्ष रूप से दिखाई दें। इसलिए शासन की सफलता केवल योजनाएँ बनाने में नहीं, बल्कि उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने में निहित है।
युवाओं की बेचैनी को केवल असंतोष या संकट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह परिवर्तन की इच्छा का संकेत भी है। इतिहास गवाह है कि समाज में बड़े परिवर्तन युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही संभव हुए हैं। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर विज्ञान, खेल, तकनीक और उद्यमिता तक हर क्षेत्र में युवाओं ने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। यदि इस ऊर्जा को शिक्षा, कौशल विकास, नवाचार, स्टार्टअप, अनुसंधान, सामाजिक सेवा और राष्ट्र निर्माण की दिशा में लगाया जाए, तो भारत विश्व का अग्रणी राष्ट्र बन सकता है। इसके लिए आवश्यक है कि युवाओं को अवसर, संसाधन और उचित मार्गदर्शन प्रदान किया जाए।
युवाओं की समस्याओं का समाधान केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। परिवार, शैक्षणिक संस्थान, समाज और निजी क्षेत्र की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। शिक्षा व्यवस्था को रोजगारोन्मुख बनाना, कौशल विकास को बढ़ावा देना, मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना तथा युवाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित करना समय की आवश्यकता है। सरकार को रोजगार सृजन, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, डिजिटल सुविधाओं और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने वाले कदम उठाने चाहिए। वहीं समाज को भी युवाओं के विचारों का सम्मान करना चाहिए और उन्हें सकारात्मक दिशा प्रदान करनी चाहिए।
युवाओं की बेचैनी किसी राष्ट्र की कमजोरी नहीं, बल्कि उसके भीतर छिपी परिवर्तन की शक्ति का संकेत है। आवश्यकता इस बात की है कि इस ऊर्जा को समझा जाए, उसे दबाया न जाए। संवाद, पारदर्शिता, भागीदारी और अवसरों के माध्यम से युवाओं के विश्वास को मजबूत किया जा सकता है। यदि युवा स्वयं भी जिम्मेदारी, अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान दें तथा शासन और समाज उनकी आकांक्षाओं का सम्मान करें, तो भारत का भविष्य अत्यंत उज्ज्वल होगा। वास्तव में, किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूँजी उसके युवा होते हैं। उनकी ऊर्जा, प्रतिभा और संकल्प ही भारत को विकास, समृद्धि और वैश्विक नेतृत्व की नई ऊँचाइयों तक पहुँचा सकते हैं।
(लेखिका बाढ़, पटना से हैं)






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