खेती में फिर लौटानी होगी संस्कृति, पानी बचाना होगा सबसे जरूरी

कृषि विवि के दीक्षारंभ में पर्यावरणविद् पद्मश्री डॉ. अनिल जोशी ने छात्रों को किया संबोधित, बोले- पारिस्थितिकी के बिना अर्थव्यवस्था सफल नहीं हो सकती

मेरठ। मोदीपुरम स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में स्नातक में प्रवेश लेने वाले नए विद्यार्थियों के लिए शनिवार को गांधी हॉल में दीक्षारंभ समारोह आयोजित किया गया। कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त के निर्देशन में हुए कार्यक्रम में देश के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् पद्मश्री डॉ. अनिल जोशी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए पर्यावरण संरक्षण और कृषि में पारंपरिक तौर-तरीकों के महत्व पर विस्तार से चर्चा की।

खेती के मौजूदा मॉडल पर उठाए सवाल

डॉ. अनिल जोशी ने पारंपरिक खेती और आधुनिक कृषि व्यवस्था की तुलना करते हुए कहा कि आज की कृषि व्यवस्था में इंसान गेहूं और धान जैसी कुछ चुनिंदा फसलों पर अत्यधिक निर्भर हो गया है। उन्होंने कहा कि कृषि और औद्योगीकरण के मौजूदा तौर-तरीकों ने पारिस्थितिक संतुलन को प्रभावित किया है। इसका असर पर्यावरण और मानव जीवन पर लगातार दिखाई दे रहा है।

उन्होंने कहा कि इंसानी जरूरतों और लालच के कारण प्रकृति के संसाधनों का असंतुलित इस्तेमाल हुआ है। कीटनाशकों के अनियंत्रित प्रयोग और खेती योग्य भूमि के लगातार कम होने से प्रदूषण और पर्यावरणीय संकट बढ़ रहा है।

'पारिस्थितिकी के बिना अर्थव्यवस्था अधूरी'

पर्यावरणविद् ने कहा कि "पारिस्थितिकी के बिना कोई भी अर्थव्यवस्था सफल नहीं हो सकती।" उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य सरकारों को खेती के लिए पर्याप्त भूमि सुरक्षित रखनी चाहिए और उसकी रक्षा उसी गंभीरता से करनी चाहिए, जिस तरह वन भूमि का संरक्षण किया जाता है।

उन्होंने कहा कि जलवायु और पर्यावरण में बदलाव के प्रभाव अब दुनिया के सामने स्पष्ट हैं। प्राकृतिक घटनाओं और पर्यावरणीय असंतुलन से बचने के लिए विकास के साथ प्रकृति का संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

कृषि को फिर संस्कृति से जोड़ने की जरूरत

डॉ. जोशी ने कहा कि आज खेती के बजाय एग्री-बिजनेस पर अधिक जोर दिया जा रहा है। खेती के पारंपरिक मूल्यों और संस्कृति को फिर से कृषि व्यवस्था का हिस्सा बनाने की जरूरत है। उन्होंने विद्यार्थियों से पानी बचाने को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उनके अनुसार जल संरक्षण पर ध्यान दिया जाए तो पर्यावरण और प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने में काफी मदद मिलेगी।

कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

अधिकारियों ने किया स्वागत और आभार

कार्यक्रम में कुलसचिव डॉ. वीके सिंह ने अतिथियों और विद्यार्थियों का स्वागत किया। निदेशक ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट डॉ. आरएस सेंगर ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा, जबकि संचालन प्रोफेसर रेखा दीक्षित ने किया। इस अवसर पर डॉ. डीके सिंह, डीन पीजी, डॉ. एलबी सिंह, डॉ. विपुल गुप्ता, डॉ. बुधेश गौतम सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक और अधिकारी मौजूद रहे।

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