उल्देपुर में मेडा का री-सर्वे, कागजात लेकर सड़क पर उतरे लोग
कॉलोनीवासियों का सवाल—अवैध थीं तो रजिस्ट्री कैसे हुई, बिजली कनेक्शन किसने दिए? बोले- जिंदगी भर की जमा पूंजी मकान में लगा दी
मेरठ। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अवैध निर्माण और कॉलोनियों को लेकर बढ़ी हलचल के बीच सोमवार को मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) की टीम मवाना रोड स्थित उल्देपुर गांव पहुंची। टीम ने कॉलोनियों का री-सर्वे कर मेडा की स्थापना से पहले और बाद में विकसित हुई कॉलोनियों की जानकारी जुटाई। टीम के पहुंचते ही कॉलोनीवासी अपने मकानों और भूखंडों से जुड़े पुराने दस्तावेज लेकर मौके पर पहुंच गए।
री-सर्वे के दौरान लोगों ने अधिकारियों को रजिस्ट्री समेत पुराने कागजात दिखाए। इसी बीच कॉलोनीवासियों ने कई सवाल भी खड़े किए। उनका कहना था कि जब कॉलोनियां अवैध तरीके से विकसित हो रही थीं, तब मेडा के अधिकारी कहां थे? यदि कॉलोनियां अवैध थीं तो रजिस्ट्री कार्यालय में भूखंडों की रजिस्ट्री कैसे होती रही। मकानों में बिजली के कनेक्शन भी दिए गए, फिर अब कार्रवाई की बात क्यों हो रही है?
‘हम जाएं तो जाएं कहां’
कॉलोनीवासियों का कहना था कि उन्होंने अपनी जिंदगी भर की जमा पूंजी मकान बनाने में लगा दी। कई परिवार वर्षों से यहां रह रहे हैं। अब कार्रवाई की तलवार लटकने से लोगों में बेचैनी है। लोगों ने कहा कि विभागीय स्तर पर वर्षों तक रजिस्ट्री और बिजली कनेक्शन जैसी प्रक्रियाएं चलती रहीं, ऐसे में अब मकान मालिकों को ही जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
दस्तावेजों से तलाशा जा रहा निर्माण का इतिहास
मेडा टीम ने कॉलोनियों के विकास और वहां हुए निर्माण की स्थिति की जानकारी जुटाई। अधिकारियों ने पुराने और नए निर्माण से संबंधित दस्तावेज भी देखे। री-सर्वे के दौरान टीम के कर्मचारियों को लोगों के सवालों और बड़ी संख्या में सामने आए दस्तावेजों के कारण काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शहर में अवैध निर्माण को लेकर हड़कंप मचा हुआ है। 16,726 अवैध इमारतों को लेकर दिए गए आदेश के बाद मेडा की ओर से सर्वे और जांच की प्रक्रिया तेज की गई है। उल्देपुर में सोमवार को हुआ री-सर्वे इसी कार्रवाई की कड़ी माना जा रहा है। अब सर्वे रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई को लेकर कॉलोनीवासियों की निगाहें मेडा पर टिकी हैं।

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