ये पैचवर्क का मेकअप....!

- ललिता जोशी
पैच वर्क एक आर्ट है । ये कारीगरी कपड़ों पर की जाती है । ये कला का एक नायाब नमूना है । इस पैच वर्क से परिधान की खूबसूरती बढ़ जाती है । पैच वर्क कपड़े पर कपड़े से किया जाता है । ये परिधानों, बेड शीट और तौलियों और रुमालों पर भी किया जाता है । पैचवर्क कपड़ों के अलावा मेंहदी, टेटू इत्यादि में भी पैचवर्क किया जाता है । पैचवर्क से परिधानों की सुंदरता और कीमत में वृद्धि हो जाती और विक्रेता को अच्छा मुनाफा मिलता है । पैचवर्क इतना लोकप्रिय है कि वो अब मेहंदी और टैटू में भी प्रयोग किया जा रहा है ।

पैचवर्क का प्रयोग तो अब रिपेयर वर्क में भी होने लगा है । सड़कों पर टूट -फूट हो तो पैचवर्क कर दो हो गया रिपेयर और सड़क ठीक हो गई । दिखने में तो सड़क  ठीक लगती है लेकिन उस पर गाड़ी चलाने वालों से पूछो । कितने जर्क और झटके लगते हैं गाड़ियों और उन्हें चलाने वालों को । शहर की  रोड पर तो गाड़ियों की गति सीमा निर्धारित होती है तो गाड़ी को झटके लगे तो वो संभाल लेगी । यही पैच जब एक्सप्रेस वे और हाइवे पर टूटी सड़कों का शृंगार करता है तो वो शृंगार नहीं उसके शरीर पर पड़े उन गड्ढों को ढकने का काम करते हैं । इससे गड्ढे  भरे नहीं जाते बल्कि उनको पैच से छुपा दिया जाता है ।

सड़क पर लगे पैच सड़क की खूबसूरती नहीं बढ़ाते हैं । ये तो गाड़ियों की स्पीड पर ब्रेक और जर्क लगते हैं और गाडियाँ खराब होती है । एक आम आदमी रोड टैक्स और टोल टैक्स और न जाने कौन -कौन से टैक्स सरकार को देते हैं । इसके बदले में क्या मिलता है आम जनता को पैचवर्क से भरी हुई सड़कें जो  पुलों, एक्सप्रेस वे और शहरों में भी हैं । एक पैच परिधान की खुबसूरती बढ़ती है तो सड़कों पर हुए पैचवर्क से गाड़ी और आदमी दोनों के जीवन पर खतरा बढ़ता है । आए दिन गाडियाँ और दुपहिया वाहन इन गड्ढों में गिर जाते हैं । इतना ही नहीं कई बार तो ये अपनी जान से हाथ धो लेते हैं । किसी भी घर का सदस्य अगर इस दुनिया से चले जाये तो उस पर आश्रित का क्या हाल होत है ये सोच कर भी रूह काँप जाती है ।

करोड़ों -अरबों रुपये खर्च करके बनाई गई ये रोड अक्सर लोगों को ईश्वर के स्थान पर ही भेज देती हैं । एक शहर से दूसरे शहर यात्रा का तो पता नहीं लेकिन ईश्वर के पास जाने का मार्ग तो प्रशस्त कर ही देती है या फिर सीधे अस्पताल पहुंचा देती है । सरकार से नम्र निवेदन है कि पैचवर्क सड़कों पर नहीं सिर्फ कपड़ों ,मेंह्ंदी और टेटू में ही अच्छी लगती है । इसीलिए सड़कें तो पैचवर्क से मुक्त रखें।  

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