एमजीसीयू कुलपति की नियुक्ति पर उठे सवाल, पटना हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

प्रो. संजय श्रीवास्तव को नोटिस, 10 वर्ष के प्रोफेसर अनुभव की योग्यता को लेकर दायर है याचिका

मोतिहारी। महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय (एमजीसीयू), मोतिहारी के कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव की नियुक्ति में निर्धारित योग्यता पूरी होने को लेकर पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। मामले में न्यायालय ने कुलपति समेत संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। हालांकि, नियुक्ति को लेकर लगाए गए आरोपों पर अभी कोई अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं आया है।

17 सितंबर को हुई सुनवाई, दो सप्ताह में दस्तावेज देने के निर्देश

CWJC No. 7146 of 2026, डॉ. संदीप पहल बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में 17 सितंबर 2026 को न्यायमूर्ति अजीत कुमार की अदालत में सुनवाई हुई। केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने याचिका में लगाए गए आरोपों पर विस्तृत पैरा-वाइज जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। न्यायालय ने प्रतिवादी संख्या-5 प्रो. संजय श्रीवास्तव को साधारण डाक और एडी के साथ रजिस्टर्ड पोस्ट, दोनों माध्यमों से नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। संबंधित आवश्यक दस्तावेज दो सप्ताह के भीतर दाखिल करने को कहा गया है।

10 साल के प्रोफेसर अनुभव की शर्त पर याचिका में सवाल

याचिकाकर्ता डॉ. संदीप पहल ने UGC Regulations, 2018 के Clause 7.3(i) का हवाला देते हुए दावा किया है कि कुलपति पद के लिए निर्धारित विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में न्यूनतम 10 वर्ष के अनुभव की शर्त पूरी नहीं होती थी। याचिका के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय ने 21 मई 2022 को एमजीसीयू के कुलपति पद के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे और आवेदन की अंतिम तिथि 20 जून 2022 थी।

याचिका में कहा गया है कि बीएचयू की कार्यपरिषद ने 4 अक्टूबर 2012 को CAS के तहत डॉ. संजय श्रीवास्तव की प्रोफेसर पद पर पदोन्नति को मंजूरी दी थी और 5 अक्टूबर 2012 को इसकी अधिसूचना जारी हुई। याचिकाकर्ता का तर्क है कि वास्तविक पदोन्नति या पदभार ग्रहण करने की तिथि से अनुभव की गणना करने पर जून 2022 की अंतिम तिथि तक 10 वर्ष का अनुभव पूरा नहीं होता था।

पुराने हाईकोर्ट फैसले और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का भी हवाला

याचिका में पटना हाईकोर्ट के CWJC No. 16680 of 2014, Ram Tawakya Singh बनाम State of Bihar मामले में 18 दिसंबर 2015 को दिए गए फैसले का हवाला दिया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, इस फैसले में कुलपति पद के लिए आवश्यक 10 वर्ष के प्रोफेसर अनुभव को वास्तविक कार्य-अनुभव से जोड़कर देखा गया था और केवल पूर्वप्रभावी अथवा नोशनल पदोन्नति के आधार पर अनुभव की गणना पर सवाल उठाया गया था।

याचिका में Union of India v. M. Bhaskar मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी उल्लेख करते हुए इसी आधार पर दलील दी गई है कि केवल नोशनल प्रमोशन की पिछली तारीख के आधार पर अनुभव की गणना नहीं की जानी चाहिए। याचिकाकर्ता ने कुलपति पद के उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग के दौरान वास्तविक प्रोफेसर अनुभव की जांच किए जाने की मांग की है।

15 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

पटना हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है। कुलपति की नियुक्ति से संबंधित याचिका में लगाए गए आरोपों पर अंतिम स्थिति न्यायालय की आगामी सुनवाई और आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।

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