हापुड़ में किसानों के विद्युत बिलों की समस्याओं के समाधान की कवायद

15 से 30 सितंबर और 15 से 30 अक्टूबर तक पोर्टल पर कर सकेंगे आवेदन, खंड कार्यालयों में लगेंगे विशेष काउंटर

मेरठ। हापुड़ जनपद के किसानों के प्राइवेट ट्यूबवेल (पीटीडब्ल्यू) के विद्युत बिलों में संशोधन एवं समाधान के लिए विद्युत विभाग ने कवायद शुरू की है। किसानों की बिल संबंधी शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए प्रबंध निदेशक रवीश गुप्ता (आईएएस) ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में हापुड़ की जिलाधिकारी कविता मीणा (आईएएस) भी मौजूद रहीं।

प्रबंध निदेशक ने कहा कि किसानों की विद्युत बिल संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए सरल, पारदर्शी और समयबद्ध व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। प्राप्त शिकायतों का नियमानुसार परीक्षण कर उनका शीघ्र निस्तारण किया जाए।

उन्होंने बताया कि किसानों के पीटीडब्ल्यू विद्युत बिलों से संबंधित मामलों के लिए पोर्टल दो चरणों में खोला जाएगा। पहले चरण में 15 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक तथा दूसरे चरण में 15 अक्टूबर से 30 अक्टूबर 2026 तक किसान पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे।

खंड कार्यालयों में लगेंगे विशेष काउंटर

किसानों की सुविधा के लिए संबंधित खंड कार्यालयों में विशेष काउंटर स्थापित किए जाएंगे। इन काउंटरों पर किसानों को पोर्टल पर आवेदन करने और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने में सहायता दी जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसानों को आवेदन प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों के संबंध में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

प्रबंध निदेशक ने किसानों से अपील की कि वे अपने प्रकरण से संबंधित प्रमाणित साक्ष्य और आवश्यक दस्तावेजों के साथ ही पोर्टल पर आवेदन करें, ताकि मामलों का नियमानुसार परीक्षण कर उनका शीघ्र समाधान किया जा सके।

व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश

प्रबंध निदेशक ने अधिशासी अभियंताओं और उपखंड अधिकारियों को निर्देश दिए कि आवेदन प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज और पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड करने की प्रक्रिया की जानकारी किसानों को उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही पोर्टल खुलने की तिथियों और आवेदन प्रक्रिया का समाचार पत्रों में प्रकाशन कराने, किसानों को एसएमएस के माध्यम से सूचना देने तथा खंड कार्यालयों में बैनर लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं का समयबद्ध और पारदर्शी समाधान डिस्कॉम की प्राथमिकता है। अधिकारियों को किसानों के मामलों में संवेदनशीलता के साथ कार्य करते हुए नियमानुसार शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

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