सड़क हादसों पर राजस्थान पुलिस का बड़ा प्लान! ब्लैक स्पॉट से 200 मीटर पहले Google Maps देगा अलर्ट
‘ऑपरेशन सेफर रोड्स’ के तहत जयपुर रेंज के 101 खतरनाक स्थानों की डिजिटल मैपिंग; रेड, ऑरेंज और येलो कैटेगरी में बांटे गए ब्लैक स्पॉट
जयपुर, 3 सितंबर 2026।राजस्थान में सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए जयपुर रेंज पुलिस ने तकनीक का सहारा लेते हुए नई पहल शुरू की है। ‘ऑपरेशन सेफर रोड्स’ के तहत अब वाहन चालकों को खतरनाक सड़क या ब्लैक स्पॉट से करीब 200 मीटर पहले Google Maps पर वॉयस और विजुअल अलर्ट मिलेगा। इसका उद्देश्य चालकों को पहले से सावधान करना और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में उनकी गति नियंत्रित कराना है।
101 ब्लैक स्पॉट की डिजिटल मैपिंग
जयपुर रेंज के प्रमुख नेशनल और स्टेट हाईवे पर वर्ष 2023 से 2025 के बीच हुए सड़क हादसों के आंकड़ों का अध्ययन किया गया। इसके आधार पर 101 दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान की गई है।
इन सभी ब्लैक स्पॉट की डिजिटल मैपिंग कर उन्हें नेविगेशन सिस्टम से जोड़ा गया है। वाहन चालक जैसे ही किसी ऐसे क्षेत्र की ओर बढ़ेंगे, उन्हें पहले से ही वॉयस और विजुअल अलर्ट मिलने की व्यवस्था की गई है।
किस जिले में कितने ब्लैक स्पॉट?
जयपुर रेंज के 101 ब्लैक स्पॉट अलग-अलग जिलों में इस तरह चिन्हित किए गए हैं—
- जयपुर ग्रामीण: 28
- दौसा: 24
- कोटपूतली-बहरोड़: 19
- अलवर: 11
- सीकर: 10
- भिवाड़ी: 5
- खैरथल-तिजारा: 3
- झुंझुनूं: 1
हादसों और मौतों के आधार पर तीन कैटेगरी
पुलिस ने इन स्थानों को दुर्घटनाओं और मौतों के आंकड़ों के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा है।
रेड यानी ‘A’ कैटेगरी: इसमें 6 अति-संवेदनशील ब्लैक स्पॉट रखे गए हैं, जहां 20 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है।
ऑरेंज यानी ‘B’ कैटेगरी: इसमें 30 स्थान शामिल हैं, जहां 10 से 20 मौतें दर्ज की गई हैं।
येलो यानी ‘C’ कैटेगरी: इसमें 57 ऐसे स्थान हैं, जहां 5 से 10 लोगों की जान गई है।
इन ब्लैक स्पॉट की स्थिति की हर तीन महीने में समीक्षा की जाएगी, ताकि जरूरत के अनुसार सुरक्षा उपायों में बदलाव किया जा सके।
पूरे राजस्थान के हाईवे पर लागू करने की तैयारी
जयपुर रेंज में तकनीकी व्यवस्था शुरू करने के बाद अब इसे राजस्थान के अन्य हाईवे तक विस्तार देने की तैयारी है। इसके लिए डीजी ट्रैफिक और एनएचएआई के क्षेत्रीय निदेशक को पत्र भेजा गया है।
पुलिस का मानना है कि अगर वाहन चालकों को खतरनाक स्थान की जानकारी पहले ही मिल जाए तो वे अपनी रफ्तार कम कर सकते हैं और ज्यादा सावधानी बरत सकते हैं। इससे दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों को कम करने में मदद मिल सकती है।


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