सत्येंद्र जैन को STP केस में बड़ी राहत, राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 2 लाख के मुचलके पर दी जमानत

दिल्ली जल बोर्ड के STP टेंडर में कथित अनियमितताओं और हेरफेर के मामले में 18 अगस्त को हुई थी गिरफ्तारी; ACB ने लगाए थे गंभीर आरोप

नई दिल्ली, 3 सितंबर 2026।

दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से जुड़े कथित घोटाले में आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को बड़ी राहत मिली है। राऊज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें 2 लाख रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी है।

विशेष पीसी जज दिग विनय सिंह ने जैन की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया। सत्येंद्र जैन को दिल्ली पुलिस की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने 18 अगस्त 2026 को STP के उन्नयन से जुड़े टेंडर में कथित अनियमितताओं और हेरफेर के आरोप में गिरफ्तार किया था।

19 अगस्त को भेजे गए थे न्यायिक हिरासत में

गिरफ्तारी के बाद सत्येंद्र जैन को 19 अगस्त को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। यह मामला वर्ष 2024 में दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था।

FIR में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप दर्ज किए गए थे।

टेंडर में हेरफेर का आरोप

जांच एजेंसी का आरोप है कि दिल्ली जल बोर्ड के STP के विस्तार और उन्नयन से जुड़ी निविदा प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं। आरोप के मुताबिक, टेंडर की तकनीकी शर्तों को इस तरह तैयार किया गया कि एक विशेष तकनीक प्रदाता कंपनी Euroteck Environmental को फायदा मिल सके।

ACB का दावा है कि टेंडर प्रक्रिया को जानबूझकर तकनीक-केंद्रित बनाया गया, जिससे प्रतिस्पर्धा सीमित हुई और एक निजी संस्था को कथित तौर पर अनुचित लाभ मिला।

रोहिणी STP की क्षमता बढ़ाने पर भी सवाल

जांच में आरोप लगाया गया कि रोहिणी STP की क्षमता को बिना पर्याप्त तकनीकी व्यवहार्यता अध्ययन के 15 MGD से बढ़ाकर 30 MGD कर दिया गया। इससे परियोजना की लागत में करीब 123 करोड़ रुपये की वृद्धि होने का दावा किया गया है।

ACB ने मामले में कथित कमीशन और पैसों के लेन-देन की जांच का भी दावा किया है। एजेंसी के मुताबिक, बिचौलियों के जरिए रकम अलग-अलग आरोपियों के बैंक खातों तक पहुंचाए जाने की आशंका की जांच की जा रही है।

जमानत का मतलब आरोप खत्म होना नहीं

कोर्ट से जमानत मिलने के बाद सत्येंद्र जैन को इस मामले में बड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन जमानत का अर्थ आरोपों से दोषमुक्त होना नहीं है। मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। ACB की ओर से लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अदालत की कार्यवाही और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।

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