68500 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का लखनऊ में जोरदार प्रदर्शन
आठ साल से जारी संघर्ष के बाद भी नहीं मिली नियुक्ति, रिक्त पदों को इसी भर्ती के पात्र अभ्यर्थियों से भरने की मांग
मेरठ/लखनऊ, 2 सितंबर। 68500 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने बुधवार को लखनऊ में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों ने सरकार से मांग की कि भर्ती में रिक्त रह गए पदों को उसी भर्ती के पात्र अभ्यर्थियों से भरा जाए। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे करीब आठ वर्षों से नियुक्ति की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें आश्वासन के अलावा ठोस कार्रवाई नहीं मिली है।
धरने का नेतृत्व कर रहे आदित्य पांडेय ‘संघर्षी’ ने कहा कि वर्ष 2018 में 68500 शिक्षक भर्ती का परिणाम जारी होने के बाद से ही अभ्यर्थी अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनके मुताबिक, शासन के स्तर पर जारी आदेश का पालन नहीं होने के कारण भर्ती के करीब 27 हजार पद रिक्त रह गए।
अभ्यर्थियों ने कहा कि वर्ष 2018 में प्रदेश में पहली बार लिखित परीक्षा के आधार पर शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया शुरू हुई थी। परीक्षा से पहले कटऑफ में बदलाव को लेकर शासनादेश जारी किया गया था, लेकिन भर्ती परिणाम आने के बाद उसे वापस ले लिया गया। आंदोलनकारियों का दावा है कि इसी वजह से बड़ी संख्या में पद खाली रह गए।
‘आठ साल से सड़कों पर संघर्ष’
अभ्यर्थियों का कहना है कि लंबे समय से वे सरकार और विभाग के समक्ष अपनी मांग रखते आ रहे हैं, लेकिन अभी तक समाधान नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि जिन अभ्यर्थियों को सरकारी विद्यालयों में बच्चों के भविष्य को संवारने में योगदान देना चाहिए था, वे नीतिगत फैसलों और विभागीय स्तर पर लंबित प्रक्रिया के कारण आंदोलन करने को मजबूर हैं।
आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मामले में हस्तक्षेप कर 68500 शिक्षक भर्ती के रिक्त पदों को इसी भर्ती के पात्र अभ्यर्थियों से भरने की मांग पूरी करने की अपील की।
धरने में आदित्य पांडेय (बस्ती), शिप्रा सक्सेना (मेरठ), अनुज (बिजनौर), संजय चौरसिया (फैजाबाद), मंजुलता (अंबेडकरनगर), दिव्या गौतम (आजमगढ़), विवेक उत्कर्ष और राघवेंद्र पाठक समेत बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शामिल रहे।


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