ध्वस्तीकरण की तैयारी तेज, पांच साल में कैसे बस गईं 100 से ज्यादा अवैध कॉलोनियां?
न्यायिक आयोग जांचेगा जिम्मेदार अफसरों की भूमिका, बिजली कनेक्शन और रजिस्ट्री पर भी उठे सवाल; 9 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में देनी है कार्रवाई की रिपोर्ट
मेरठ। उल्देपुर में अवैध कॉलोनियों के ध्वस्तीकरण के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) ने कार्रवाई की रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। साथ ही न्यायिक आयोग यह भी जांच करेगा कि महज पांच साल में लाल डोरा क्षेत्र में 100 से अधिक अवैध कॉलोनियां कैसे विकसित हो गईं और संबंधित विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की।
उल्देपुर में बजरंग कुंज, श्याम कुंज, कैलाश कुंज, माधव कुंज, कृष्ण कुंज, विनायक कुंज, अमर कुंज, सावरिया कुंज, शिव कुंज, वासुदेव कुंज, गोधाम और तीरपाल एंक्लेव समेत कई कॉलोनियां विकसित हुई हैं। कुछ ही वर्षों में गांव का स्वरूप तेजी से बदलने को लेकर अब विभागीय स्तर पर भी सवाल उठ रहे हैं।
पहले कार्रवाई, फिर दोबारा विकसित हुईं कॉलोनियां
मेडा के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में विकसित हुई अवैध कॉलोनियों पर एक-एक बार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा चुकी है। इसके बावजूद कुछ स्थानों पर दोबारा निर्माण और कॉलोनियां विकसित होने की शिकायतें सामने आईं। दोबारा कॉलोनी विकसित करने वालों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई। अब मेडा पुलिस से इन मामलों में हुई कार्रवाई की जानकारी जुटा रहा है।
बिजली कनेक्शन और रजिस्ट्री भी जांच के घेरे में
अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई के बावजूद वहां बिजली के खंभे और लाइनें पहुंचने तथा भूखंडों की रजिस्ट्री जारी रहने के मामले ने भी सवाल खड़े किए हैं। मेडा की ओर से विद्युत विभाग और रजिस्ट्री विभाग से पत्राचार किए जाने की बात कही गई है। न्यायिक जांच में इन विभागों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
9 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में देनी है रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मेडा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की रूपरेखा तैयार कर रहा है। 9 दिसंबर 2026 को अदालत में कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत की जानी है। ध्वस्तीकरण के दौरान पुलिस-प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी बड़ी चुनौती होगी। कार्रवाई की आशंका से कॉलोनी मालिकों और भूखंड खरीदारों में पहले से विरोध के स्वर सामने आ रहे हैं।
मेडा उपाध्यक्ष संजय कुमार मीना के अनुसार, उल्देपुर में पहले भी अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और उसका रिकॉर्ड उपलब्ध है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा।

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