जंतर-मंतर बना आंदोलनों का केंद्र, पेपर लीक के खिलाफ Gen-Z का अनोखा प्रदर्शन

नई दिल्ली। देश की राजधानी का ऐतिहासिक जंतर-मंतर लंबे समय से लोकतांत्रिक विरोध और जन आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है। मजदूर-किसान आंदोलनों से लेकर अन्ना आंदोलन, निर्भया न्याय आंदोलन और पहलवानों के धरने तक, यहां हुए कई प्रदर्शनों ने देश की राजनीति और नीतियों को प्रभावित किया है। वर्ष 2026 में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ Gen-Z युवाओं का आंदोलन भी जंतर-मंतर पर चर्चा का केंद्र बना।

मीम से आंदोलन तक पहुंचा अभियान

रिपोर्ट के अनुसार, मई 2026 में बेरोजगार युवाओं और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट्स को कथित तौर पर ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ कहे जाने के बाद युवाओं ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम को ही अपने प्रतीक के रूप में अपना लिया। सोशल मीडिया के जरिए शुरू हुआ यह अभियान धीरे-धीरे जंतर-मंतर पर बड़े युवा आंदोलन में बदल गया। प्रदर्शनकारियों ने NEET समेत प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक पर रोक, व्यवस्था की जवाबदेही और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे जैसी मांगें उठाईं।

संसद मार्च के दौरान टकराव

20 जुलाई को मानसून सत्र के पहले दिन प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च किया। इस दौरान दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ झड़प हुई। बैरिकेड तोड़े गए और पुलिस की ओर से लाठीचार्ज तथा आंसू गैस के गोले छोड़े जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है। इसके बाद मध्य दिल्ली के कुछ इलाकों में इंटरनेट सेवाओं पर भी प्रतिबंध लगाया गया।

जंतर-मंतर पर कई बड़े आंदोलन

जंतर-मंतर पर पिछले दशकों में उत्तराखंड राज्य आंदोलन, जेसिका लाल प्रकरण, अन्ना आंदोलन, निर्भया न्याय आंदोलन और 2023 में पहलवानों का धरना जैसे कई महत्वपूर्ण आंदोलन हुए हैं। इन आंदोलनों ने समय-समय पर सरकार और राजनीतिक व्यवस्था पर दबाव बनाया।

सोशल मीडिया से संचालित आंदोलन

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, 2026 का युवा आंदोलन 1974 के जेपी आंदोलन से कुछ समानताएं रखता है। दोनों में बेरोजगारी और व्यवस्था की नाकामी जैसे मुद्दे प्रमुख रहे, लेकिन मौजूदा आंदोलन का स्वरूप सोशल मीडिया आधारित और विकेंद्रीकृत बताया गया।

कई महानगरों तक पहुंचा प्रदर्शन

रिपोर्ट के मुताबिक आंदोलन दिल्ली से आगे मुंबई, बेंगलुरु, पटना और कोलकाता तक भी पहुंचा। विपक्षी दलों ने संसद के भीतर और बाहर सरकार को घेरा। सरकार की ओर से परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और छात्रों का शैक्षणिक वर्ष बर्बाद न होने देने का आश्वासन दिए जाने की बात कही गई।

इस्तीफे के बाद आंदोलन समाप्त

रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ने जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन को खत्म करने का ऐलान किया। संगठन के प्रवक्ताओं ने सरकार के साथ अपनी तीन प्रमुख मांगों पर सहमति बनने की बात कही।

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