गुरुकुल प्रभात आश्रम में अखिल भारतीय वैदिक शोध संगोष्ठी शुरू

पंच परिवर्तन सिद्धांतों पर देशभर के विद्वानों ने किया मंथन, सीसीएसयू के संस्कृत विभाग के शिक्षकों और शोधार्थियों ने लिया हिस्सा

मेरठ। स्वामी समर्पणानन्द वैदिक शोध संस्थान एवं उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में गुरुकुल प्रभात आश्रम, भोला झाल, टीकरी में दो दिवसीय अखिल भारतीय वैदिक शोध संगोष्ठी का शुभारंभ शनिवार को हुआ। 22 और 23 अगस्त को आयोजित इस संगोष्ठी में देशभर के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के प्राध्यापक, वैदिक विद्वान और शोधार्थी हिस्सा ले रहे हैं।

संगोष्ठी के पहले दिन ‘वैदिक वाङ्मय के आलोक में पंच परिवर्तन सिद्धांत’ विषय पर विद्वानों ने समसामयिक संदर्भों में चर्चा की। वक्ताओं ने वैदिक साहित्य, भारतीय ज्ञान परंपरा और वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों के बीच संबंधों पर अपने विचार साझा किए। संगोष्ठी में वैदिक ज्ञान की प्रासंगिकता और सामाजिक परिवर्तन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी मंथन हुआ।

सीसीएसयू के संस्कृत विभाग की सहभागिता

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के संस्कृत एवं प्राच्य भाषा विभाग के सहविभागाध्यक्ष डॉ. प्रशान्त शर्मा के नेतृत्व में विभागीय शिक्षक, शोधार्थी और छात्र-छात्राओं का दल संगोष्ठी में शामिल हुआ। आयोजक संस्थान की ओर से डॉ. प्रशान्त शर्मा का माल्यार्पण, श्रीफल और अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत किया गया।

संगोष्ठी में सीसीएसयू के शोधार्थियों को देश के प्रतिष्ठित वैदिक विद्वानों और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विचारकों के साथ संवाद करने का अवसर मिला। इससे उन्हें शोध के नए आयाम और दृष्टिकोण प्राप्त हुए।

प्रतिष्ठित विद्वानों के विचार सुने

शोधार्थियों ने प्रज्ञाप्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक जे. नन्दकुमार, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी, मोतीहारी केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. संजीव शर्मा, रोहतक विश्वविद्यालय के प्रो. सुरेंद्र कुमार तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रो. ओमनाथ बिमली सहित अन्य विद्वानों के विचार सुने।

शैक्षिक एवं शोधपरक प्रवास में विभाग के ज्योतिष विषय के अतिथि प्रवक्ता तुषार गोयल और कार्यालय सहायक साहिल तरीका ने भी महत्वपूर्ण सहयोग किया।

दूसरे दिन शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे शिक्षक-शोधार्थी

संगोष्ठी के दूसरे दिन 23 अगस्त को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के सहविभागाध्यक्ष, शिक्षक और शोधार्थी अपने समसामयिक शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे। इस दौरान वैदिक अध्ययन और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विभिन्न विषयों पर शोधपरक चर्चा को आगे बढ़ाया जाएगा।

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