सबा फरहत केस में पुलिस कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती की तैयारी, अधिवक्ता ने लगाए फर्जी साक्ष्य गढ़ने के आरोप
मेरठ। चर्चित सबा फरहत प्रकरण में अब देहलीगेट पुलिस की कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी की जा रही है। करीब पांच महीने जेल में रहने के बाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने पर अब सबा पक्ष ने एफआईआर या चार्जशीट निरस्त कराने के लिए याचिका दाखिल करने की बात कही है।
सबा फरहत के अधिवक्ता वीके शर्मा का दावा है कि हाईकोर्ट के जमानत आदेश में मामले से जुड़े तथ्यों पर महत्वपूर्ण टिप्पणियां की गई हैं। अधिवक्ता ने पुलिस पर मनगढ़ंत साक्ष्य तैयार करने और परिवार को मानसिक रूप से परेशान करने का आरोप लगाया है। हालांकि, पुलिस का पक्ष इस संबंध में सामने नहीं आया है।
एफआईआर या चार्जशीट रद्द कराने की होगी मांग
अधिवक्ता वीके शर्मा के मुताबिक, हाईकोर्ट में क्वाशिंग याचिका दाखिल की जाएगी। इसमें निचली अदालतों के समक्ष पेश किए गए दस्तावेजों और हाईकोर्ट के आदेश को आधार बनाकर पुलिस की कार्रवाई को चुनौती दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि याचिका भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 या संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दाखिल की जा सकती है। उनका दावा है कि निचली अदालतों में पेश किए गए कई दस्तावेज सबा के पक्ष में हैं।
16 फरवरी को गिरफ्तार हुई थीं सबा
सबा फरहत को 16 फरवरी 2026 को देहलीगेट पुलिस ने गिरफ्तार किया था। अगले दिन कोर्ट में पेश करने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। निचली अदालत और बाद में जिला स्तर पर जमानत नहीं मिलने के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
27 अप्रैल को सबा के पति फरहत मसूद को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई। इसके बाद 5 अगस्त को हाईकोर्ट ने सबा फरहत को भी जमानत दे दी। करीब पांच महीने जेल में रहने के बाद वह गुरुवार को जेल से बाहर आईं।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 14 फरवरी 2026 को देहलीगेट थाना क्षेत्र निवासी रुकसाना खान की शिकायत पर दर्ज हुआ था। शिकायत में पाकिस्तान मूल की सबा फरहत और उनकी बेटी ऐमन फरहत पर फर्जी दस्तावेज और पासपोर्ट के जरिए खुद को भारतीय नागरिक दर्शाकर भारत में रहने के आरोप लगाए गए थे।
सबा पर कथित तौर पर अलग-अलग नामों से वोटर आईडी बनवाने और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर विदेश यात्रा करने के आरोप भी लगाए गए थे। शिकायत में उनके पिता के पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े होने का भी दावा किया गया था।
सबा पक्ष ने आरोपों को नकारा
सबा पक्ष की ओर से अदालत में इन आरोपों को खारिज किया गया था। उनका कहना था कि सबा ने न तो वोटर आईडी के लिए आवेदन किया और न ही पाकिस्तान के अलावा अन्य देशों की यात्रा की। बचाव पक्ष ने उनके वैध लॉन्ग टर्म वीजा समेत कई दस्तावेज भी अदालत के समक्ष रखे थे।
अब तक की कार्रवाई
- 16 फरवरी: देहलीगेट पुलिस ने सबा फरहत को गिरफ्तार किया।
- 17 फरवरी: कोर्ट में पेशी के बाद न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
- 18 फरवरी: निचली अदालत से जमानत खारिज।
- मार्च: जिला एवं सत्र अदालत में जमानत याचिकाएं खारिज हुईं।
- 27 अप्रैल: पति फरहत मसूद को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिली।
- 5 अगस्त: हाईकोर्ट ने सबा फरहत को जमानत दी।
- 14 अगस्त: सबा पक्ष ने अब पुलिस कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी शुरू की।


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