राम परात्पर ब्रह्मस्वरूप हैं : महामंडलेश्वर स्वामी अभयानंद सरस्वती
संत सेवा से भगवान की कृपा मिलती है, मानव जीवन देवताओं को भी दुर्लभ : स्वामी अभयानंद
मेरठ, 15 अगस्त 2026। गढ़ रोड स्थित राधा गोविंद मंडप में चल रहे सप्तदिवसीय सत्संग के चतुर्थ दिवस पर महामंडलेश्वर स्वामी श्री अभयानंद सरस्वती जी महाराज ने श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया। उन्होंने भगवान श्रीराम के स्वरूप, संत सेवा और मानव जीवन के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
स्वामी अभयानंद जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम परात्पर ब्रह्मस्वरूप हैं। सेवा को भगवान की इच्छा मानकर करना चाहिए। संत भगवान के दूत होते हैं और संत सेवा के माध्यम से भगवान की कृपा प्राप्त होती है।
उन्होंने प्रसिद्ध चौपाई “बड़े भाग्य मानुष तन पावा” के रहस्य को समझाते हुए कहा कि मानव शरीर देवताओं के लिए भी दुर्लभ है। यही शरीर साध्य की प्राप्ति का साधन और मोक्ष का द्वार है। सद्गुरु की कृपा से मानव जीवन का सदुपयोग करते हुए भगवान का भजन करना और भवसागर से पार होना ही जीवन का परम पुरुषार्थ है।
सत्संग के दौरान श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक विचारों को श्रद्धापूर्वक सुना। यजमान मनोज जी ने बताया कि 19 अगस्त 2026 को ला फ्लोरा में गोस्वामी तुलसीदास जयंती का पर्व मनाया जाएगा।
कार्यक्रम के अंत में आरती की गई और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर मनोज कुमार गुप्ता, बबीता गुप्ता, आरके प्रसाद, गोविंद अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में भक्तजन उपस्थित रहे।


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