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मेरठ के फ्यूचर हॉस्पिटल का वीडियो वायरल: जिंदा मरीज को मृत बताकर ले जाने का आरोप, पुलिस-डॉक्टर की भूमिका पर उठे सवाल
वायरल वीडियो के आधार पर लगाए जा रहे गंभीर आरोप, स्वतंत्र पुष्टि नहीं; जांच के बाद ही साफ होगी पूरी तस्वीर
मेरठ। मोदीपुरम स्थित फ्यूचर हॉस्पिटल से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि अस्पताल में भर्ती एक मरीज को कथित तौर पर जिंदा होने के बावजूद मृत बताया गया और उसे परिजनों की जानकारी के बिना ले जाने की कोशिश की जा रही थी। वीडियो में पुलिसकर्मियों और एक डॉक्टर के नजर आने के बाद पूरे मामले को लेकर अस्पताल प्रबंधन और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि, वायरल वीडियो में लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
परिजनों के पहुंचने के बाद बढ़ा विवाद
बताया जा रहा है कि घटना की जानकारी मिलने के बाद मरीज के परिजन मौके पर पहुंचे। इसके बाद कथित कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े हुए। परिजनों का आरोप है कि यदि मरीज जीवित था तो उसे मृत बताकर ले जाने की कोशिश क्यों की जा रही थी और इसकी जानकारी परिवार को क्यों नहीं दी गई।
घटना से जुड़े वायरल वीडियो में अस्पताल परिसर में पुलिस की मौजूदगी भी दिखाई दे रही है। इसी वजह से पुलिस की कार्रवाई और मौके पर मौजूद अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
डॉक्टर की भूमिका पर भी सवाल
वायरल वीडियो में एक डॉक्टर भी दिखाई दे रहा है। वीडियो के आधार पर सोशल मीडिया पर अस्पताल के चिकित्सकीय पक्ष को लेकर कई तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि वीडियो किस समय का है और उसमें दिखाई दे रही पूरी घटना का संदर्भ क्या है।
मामले में यह जांच का विषय है कि मरीज की वास्तविक चिकित्सकीय स्थिति क्या थी, अस्पताल के रिकॉर्ड में उसकी स्थिति किस प्रकार दर्ज की गई और मरीज को ले जाने या स्थानांतरित करने के संबंध में अस्पताल की ओर से क्या प्रक्रिया अपनाई गई।
पुलिस की मौजूदगी ने खड़े किए सवाल
घटनास्थल पर पुलिस की मौजूदगी को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। पुलिस किस सूचना या शिकायत के आधार पर अस्पताल पहुंची थी और मौके पर उसने क्या कार्रवाई की, इसकी जानकारी जांच के बाद ही सामने आ सकेगी।
फिलहाल वायरल वीडियो के आधार पर सोशल मीडिया पर अस्पताल और पुलिस की कथित मिलीभगत के आरोप लगाए जा रहे हैं, लेकिन इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच और संबंधित पक्षों का बयान सामने आना जरूरी है।
जांच के बाद साफ होगी पूरी सच्चाई
वीडियो वायरल होने के बाद मामला चर्चा में है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस और स्वास्थ्य विभाग मामले की जांच में क्या तथ्य सामने लाते हैं। अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड, मौके पर मौजूद लोगों के बयान और वायरल वीडियो की सत्यता की जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा कि मरीज की वास्तविक स्थिति क्या थी और पूरे घटनाक्रम में किसकी भूमिका रही।
फिलहाल मामला आरोपों और वायरल वीडियो तक सीमित है। आधिकारिक जांच या संबंधित अधिकारियों का बयान सामने आने के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।


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