स्वतंत्रता संग्राम में उर्दू और साहित्य की अहम भूमिका: प्रो. आमिना तहसीन
मेरठ, 13 अगस्त। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग में ‘आयुसा’ के संयुक्त तत्वावधान में ‘स्वतंत्रता संग्राम और भारतीय साहित्य’ विषय पर ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि मौलाना आजाद नेशनल उर्दू विश्वविद्यालय, हैदराबाद की महिला अध्ययन विभागाध्यक्ष प्रो. आमिना तहसीन ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता में भाषा और साहित्य की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रही। उर्दू साहित्य ने लोगों में चेतना जगाने, स्वतंत्रता की भावना को अभिव्यक्त करने और अंग्रेजों के विरुद्ध प्रतिरोध की भावना मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। मौलाना अबुल कलाम आजाद और हसरत मोहानी के समाचार-पत्रों को भी बंद किया गया था। उन्होंने कहा कि विभिन्न भारतीय भाषाओं की महिलाओं ने भी राष्ट्रीय भावनाओं और स्वतंत्रता संग्राम पर उल्लेखनीय लेखन किया।
विषय परिचय में प्रो. असलम जमशेदपुरी ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में सभी भारतीय भाषाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ. मुश्ताक अहमद वानी ने कहा कि अनेक विद्वानों, साहित्यकारों और कवियों ने स्वतंत्रता संग्राम में बलिदान दिया। डॉ. कहकशां लतीफ ने अनुवाद के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलनों और विदेशी शासन के विरोध से जुड़े साहित्य के उर्दू में आने की चर्चा की। प्रो. रेशमा परवीन ने स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं के योगदान के अध्ययन पर जोर दिया। अध्यक्षता करते हुए प्रो. सगीर अफराहीम ने कहा कि “स्वतंत्रता के संदर्भ में उर्दू में खूब कार्य हो रहा है।” कार्यक्रम में प्रो. मोहम्मद अहमद खान, मौलाना सैयद नायाबुद्दीन नायाब सहित अन्य साहित्यकार एवं शिक्षक ऑनलाइन जुड़े। संचालन डॉ. शादाब अलीम ने किया तथा स्वागत डॉ. इरशाद सियानवी ने किया।


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