राहुल गांधी को नोटिस पर भड़के संजय राउत, बोले- ‘इडियट’ को इडियट कहना गुनाह है क्या?
मुंबई। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को लोकसभा सचिवालय की ओर से नोटिस जारी किए जाने के मामले में शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी को ‘इडियट’ कहने पर नोटिस क्यों दिया जा रहा है और क्या यह शब्द असंसदीय है?
राहुल गांधी को नोटिस दिए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को ‘इडियट’ कहना असंसदीय है तो इस शब्द वाली फिल्म को सेंसर बोर्ड ने मंजूरी कैसे दी थी। उन्होंने फिल्म ‘3 इडियट्स’ का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि क्या ‘इडियट’ शब्द बोलना देश में गुनाह हो गया है?
राउत ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि कोई मंत्री संसद में नहीं आता और विपक्ष के सवालों का जवाब नहीं देता तो उसके लिए क्या शब्द इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द को सही ठहराते हुए कहा कि उन्होंने परिस्थितियों के हिसाब से बिल्कुल सही शब्द का इस्तेमाल किया है।
नितेश राणे की कांवड़ यात्रा पर भी तंज
संजय राउत ने महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितेश राणे की कांवड़ यात्रा को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राणे कार से कांवड़ यात्रा निकाल रहे थे और इसमें उनके माता-पिता भी बैठे थे। राउत ने इसे श्रवण कुमार बनने की कोशिश बताया।
उन्होंने कहा कि देश में ‘अंधभक्त’ और ‘इडियट’ दोनों तैयार कर दिए गए हैं। राउत ने राहुल गांधी के बयान का समर्थन करते हुए भाजपा और केंद्र सरकार पर राजनीतिक निशाना साधा।
बाबा रामदेव के बयान पर भी साधा निशाना
योग गुरु बाबा रामदेव के सरकारी भर्तियों में कथित भ्रष्टाचार और शिक्षा व्यवस्था को लेकर दिए गए बयान पर भी संजय राउत ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि रामदेव को अब महसूस हो रहा है कि देश में राजनीतिक माहौल बदल रहा है।
राउत ने तंज कसते हुए कहा कि शायद बाबा रामदेव को लग रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के जाने का समय आ रहा है, इसलिए उन्होंने अपनी निष्ठा की दिशा बदल ली है।
गौरतलब है कि बाबा रामदेव ने सरकारी भर्तियों में कथित पैसे के लेन-देन और भ्रष्टाचार पर सवाल उठाते हुए कहा था कि यदि ऐसी गड़बड़ियां दूर नहीं की गईं तो युवाओं और छात्रों में असंतोष बढ़ सकता है और बड़े आंदोलन फिर शुरू हो सकते हैं।


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