पुलिस अधिकारी बनकर करते थे रंगदारी वसूली, मोहकमपुर में बना रखी थी फर्जी पुलिस चौकी

इंस्टाग्राम के जरिए युवकों को जाल में फंसाकर करते थे अपहरण, दो आरोपी गिरफ्तार; कार, वॉकी-टॉकी, लैपटॉप और फर्जी दस्तावेज बरामद

मेरठ। ब्रह्मपुरी पुलिस ने पुलिस अधिकारी बनकर लोगों का अपहरण करने, मारपीट और रंगदारी वसूलने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के दो सदस्यों राहुल पाल और आकाश को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से बिना नंबर प्लेट की कार, वॉकी-टॉकी, लैपटॉप, मोबाइल फोन, फर्जी मोहर, नेम प्लेट, बीट बुक समेत पुलिस से संबंधित कई फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए हैं। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है।

पुलिस के मुताबिक, एक अगस्त को नीरज पाल ने ब्रह्मपुरी थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप लगाया कि शशांक शर्मा, राहुल, आकाश और उनके दो साथियों ने खुद को एसएचओ, सीओ, एसओ और दरोगा बताकर उसका अपहरण कर लिया। आरोपियों ने उसे बंधक बनाकर मारपीट की और फर्जी पुलिस कार्रवाई व एनकाउंटर की धमकी देते हुए दो लाख रुपये की रंगदारी मांगी। इस दौरान उसके गूगल-पे खाते से 10 हजार रुपये भी ट्रांसफर करा लिए गए।

मोहकमपुर में बना रखा था फर्जी पुलिस कार्यालय

पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि गिरोह में कुल पांच सदस्य हैं। आरोपी इंस्टाग्राम के जरिए युवकों से संपर्क करते थे और उन्हें किसी बहाने से बुलाकर खुद को पुलिस अधिकारी बताते थे। इसके बाद उन्हें अगवा कर मोहकमपुर स्थित फर्जी पुलिस कार्यालय में ले जाया जाता था। वहां पीड़ितों को फर्जी एफआईआर और पुलिस दस्तावेज दिखाकर डराया-धमकाया जाता था। पुलिस कार्रवाई और एनकाउंटर का भय दिखाकर उनसे मोटी रकम वसूली जाती थी।

पुलिस का सामान देखकर पीड़ितों को देते थे झांसा

गिरोह ने फर्जी पुलिस कार्यालय में पुलिस जैसा माहौल तैयार कर रखा था। यहां वॉकी-टॉकी, बीट बुक, फर्जी मोहर, नेम प्लेट और विभिन्न प्रार्थना पत्र व फाइलों का इस्तेमाल किया जाता था। आरोपियों का उद्देश्य पीड़ितों को यह विश्वास दिलाना था कि वे वास्तविक पुलिस अधिकारी हैं।

ये सामान हुआ बरामद

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बिना नंबर प्लेट की सफेद मारुति ऑल्टो कार, एक नंबर प्लेट, दो मोबाइल फोन, टेलीफोन, लैपटॉप, टैबलेट, कैलकुलेटर, वॉकी-टॉकी, फोन-पे रिसीवर बॉक्स, बेंत, बीट बुक, फर्जी मोहर, नेम प्लेट तथा विभिन्न प्रार्थना पत्र और फाइलें बरामद की हैं।

पुलिस अब गिरोह के फरार सदस्यों की तलाश में जुटी है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और उनसे कितनी रकम वसूली।

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