साइबर क्राइम पर शिकंजा


इलमा अज़ीम 

साइबर अपराध अब कभी-कभार होने वाली घटनाएं नहीं रह गई हैं। आज यह लगातार परेशान करने वाली हकीकत है। अगर हम अपने शहर मेरठ की बात करें तो मेरठ में साइबर ठगी लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन रही है।

 इस साल सात महीने में करीब 900 लोग साइबर ठगों का शिकार हुए और दो करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम गंवाई।दरअसल, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ऑटोमेशन की सहायता से साइबर अपराधी नित नये और जटिल तरीकों से लोगों के बैंक खातों में सेंध लगाने का काम कर रहे हैं। इस संकट से निपटने में हमारी बैंकिंग व्यवस्था व नियामक वित्तीय अनुशासन बनाने वाली संस्थाएं कामयाब नहीं हो पा रही हैं। जैसे-जैसे प्रवर्तन एजेंसियां व पुलिस साइबर अपराधियों पर शिकंजा कसने की कोशिश में नई तकनीकों का उपयोग करते हैं, साइबर अपराधी नये तौर-तरीकों के जरिये और आगे निकल जाते हैं।

 निस्संदेह, यह एक कठिन चुनौती है, जिसके लिये हमें बचाव और तत्काल कार्रवाई की मजबूत रणनीति बनानी होगी। यहां यह विचारणीय प्रश्न है कि सिस्टम की किसी कमी का अपराधी कैसे आसानी से लाभ उठा जाते हैं। विडंबना यह भी है कि साइबर अपराध के नए रूप रातों-रात सामने आ जाते हैं। जब तक हम धोखाधड़ी का तुरंत पता लगाने और तुरंत कार्रवाई करने वाले सिस्टम नहीं बनाते, हमारा वित्तीय कामकाज अक्सर साइबर अपराधियों के निशाने पर बना रहेगा। कुछ समय पहले नूह और गुरुग्राम में बड़ी संख्या में साइबर अपराधियों का पता चला था। लेकिन आज अधिक संगठित साइबर धोखाधड़ी करने वाले वाले नए इलाकों का पता चल रहा है। 

इसमें कई अपराधी तो ऐसे हैं जिन्होंने कोई औपचारिक शिक्षा तक नहीं ली है। लेकिन वे पूरे देश में सीधे-सादे लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं। बीते साल तीन सौ से अधिक संदिग्धों की गिरफ्तारी के बावजूद साइबर अपराधियों का नेटवर्क लगातार फैलता जा रहा है। बड़े पैमाने पर की गई सख्त कार्रवाई से भी अपराधियों में किसी तरह का भय न होना बताता है कि इस तरह के अपराधियों से निबटने के लिये असरदार जवाबी रणनीति बनाने की जरूरत है। जिसके अंतर्गत अपराधियों के लिये सख्त सजा का प्रावधान हो। 

अब यह धारणा बन रही है कि डेटा आधारित व्यवस्था में साइबर जोखिमों से बचना कठिन है। लेकिन फिर भी साइबर अपराधों से बचने के लिये सामूहिक संकल्प के साथ बड़े पैमाने पर जागरूकता, तकनीक आधारित सटीक संस्थागत मदद कारगर हो सकती है। मेरठ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 365 पीड़ितों की 1.90 करोड़ रुपए से अधिक की रकम वापस कराई है।

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