बॉर्डर 2’ का टेलीविजन प्रीमियर परिवारों को एक साथ जोड़ेगा: वरुण धवन

मुंबई। स्वतंत्रता दिवस के खास मौके पर ज़ी सिनेमा पर फिल्म ‘बॉर्डर 2’ के वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर को लेकर अभिनेता वरुण धवन ने फिल्म, अपने अनुभव और दर्शकों की भावनाओं को लेकर बातचीत की। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस इस फिल्म को दर्शकों के घरों तक पहुंचाने के लिए सबसे उपयुक्त अवसर है।

वरुण धवन ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस वह समय है, जब हर भारतीय हमारे सशस्त्र बलों के जवानों के बलिदान को याद करता है और ‘बॉर्डर 2’ भी इसी जज़्बे को सलाम करने वाली कहानी है। उनके मुताबिक थिएटर में फिल्म देखने का अनुभव अलग होता है, लेकिन टेलीविजन पूरे परिवार को एक साथ फिल्म देखने का अवसर देता है। माता-पिता, दादा-दादी और बच्चों के साथ घर पर फिल्म देखना इसके भावनात्मक असर को और खास बना सकता है।

उन्होंने कहा कि ज़ी सिनेमा पर अपनी फिल्मों के जरिए उन्हें दर्शकों का हमेशा प्यार मिला है और ‘बॉर्डर 2’ जैसी उनके दिल के करीब फिल्म के साथ दर्शकों के बीच लौटना उनके लिए बेहद खास है। उन्हें उम्मीद है कि दर्शक फिल्म में दिखाई गई देशभक्ति, साहस, गर्व और एकजुटता को महसूस करेंगे।

सनी देओल के साथ स्क्रीन शेयर करना रहा 

फिल्म से जुड़े अपने सबसे यादगार अनुभव के बारे में वरुण ने कहा कि उनके लिए फिल्म से जुड़े लोग सबसे खास रहे। सनी देओल के साथ स्क्रीन शेयर करना उनके लिए गर्व का अनुभव था, क्योंकि सनी देओल ‘बॉर्डर’ की विरासत को गरिमा के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।

दिलजीत दोसांझ और अहान शेट्टी के साथ काम करने का अनुभव भी उनके लिए खास रहा। उन्होंने बताया कि शूटिंग के दौरान तीनों के बीच अच्छी बॉन्डिंग बन गई, जिससे फिल्म का सफर और भी यादगार हो गया।

एक सैनिक की भूमिका निभाने को लेकर वरुण ने कहा कि ऐसे किरदार के साथ बड़ी जिम्मेदारी जुड़ी होती है। पूरी टीम ने ईमानदारी से भारतीय सशस्त्र बलों के जज़्बे को सलाम करने की कोशिश की और यह उनके लिए हमेशा गर्व की बात रहेगी।

जवानों के प्रति बढ़े सम्मान और शुक्रगुजारी

स्वतंत्रता दिवस पर ‘बॉर्डर 2’ देखने के बाद दर्शकों से अपनी अपेक्षा बताते हुए वरुण धवन ने कहा कि वह चाहते हैं कि लोगों के दिल में हमारे जवानों के प्रति शुक्रगुजारी और सम्मान की भावना और मजबूत हो।

उन्होंने कहा कि हम आजादी का जश्न मनाते हैं, लेकिन फिल्म उन लोगों की याद दिलाती है, जो हर दिन देश की आजादी और सुरक्षा को संभव बनाते हैं। यदि परिवार साथ बैठकर फिल्म देखने के बाद जवानों के साथ-साथ उनके परिवारों के बलिदान को भी महसूस करें और उनके प्रति गर्व बढ़े, तो उनके लिए इससे बड़ी उपलब्धि कोई नहीं होगी।

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