179 दिन बाद जेल से बाहर आईं पाकिस्तानी मूल की सबा फरहत, बेटे फराज को गले लगाकर रो पड़ीं

मेरठ। करीब 179 दिन जेल में रहने के बाद पाकिस्तानी मूल की सबा फरहत गुरुवार शाम रिहा होकर अपने घर पहुंचीं। जेल से बाहर आते ही बेटे फराज अहमद को सामने देखकर वह भावुक हो गईं और उसे गले लगाकर फफक पड़ीं। घर पहुंचने पर परिवार के सदस्यों की आंखें भी नम हो गईं। लंबे समय बाद सबा की वापसी से घर का माहौल भावुक रहा।

सबा ने मीडिया से कोई बातचीत नहीं की। परिवार के मुताबिक वह फिलहाल अपने परिजनों के साथ समय बिताना चाहती हैं।

16 फरवरी को जेल भेजी गई थीं सबा

सबा फरहत को 16 फरवरी 2026 को जिला कारागार में दाखिल किया गया था। उनके खिलाफ 14 फरवरी को देहलीगेट थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता रुकसाना खान ने आरोप लगाया था कि पाकिस्तान मूल की सबा उर्फ नाजी उर्फ नाजिया और उनकी बेटी ऐमन फरहत फर्जी दस्तावेज और पासपोर्ट के जरिए खुद को भारतीय नागरिक दर्शाकर मेरठ में रह रही हैं।

शिकायत में सबा के पति फरहत मसूद से पाकिस्तान में निकाह और उनके तीन बच्चों का भी उल्लेख किया गया था। सबा की बेटी ऐमन की नागरिकता और दस्तावेजों को लेकर भी आरोप लगाए गए थे।

फर्जी दस्तावेज और नागरिकता को लेकर लगे थे आरोप

सबा पर कथित तौर पर अलग-अलग नामों से वोटर आईडी बनवाने और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पाकिस्तान समेत अन्य देशों की यात्रा करने के आरोप लगाए गए थे। शिकायत में उनके पिता पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े होने का भी दावा किया गया था।

हालांकि, सबा पक्ष ने इन आरोपों से इनकार किया। बचाव पक्ष की ओर से अदालत में कहा गया कि सबा ने कभी वोटर आईडी के लिए आवेदन नहीं किया और न ही पाकिस्तान के अलावा किसी अन्य देश की यात्रा की।

निचली अदालत से जमानत खारिज होने के बाद हाईकोर्ट पहुंचीं

गिरफ्तारी के बाद सबा ने निचली अदालत में जमानत याचिका दाखिल की थी, लेकिन वहां से राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया।

सबा की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई कि उनके पास 10 मार्च 2027 तक वैध लॉन्ग टर्म वीजा है और वह करीब 35 वर्षों से भारत में रह रही हैं। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि उनके खिलाफ पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं रहा है।

बेटी ऐमन के भारतीय पासपोर्ट और नागरिकता के लिए किए गए आवेदनों से जुड़े दस्तावेज भी अदालत के समक्ष रखे गए। वोटर आईडी को लेकर लगाए गए आरोपों का भी बचाव पक्ष ने खंडन किया।

6 अगस्त को हाईकोर्ट से मिली थी जमानत

हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध रिकॉर्ड पर विचार करने के बाद 6 अगस्त को सबा फरहत को जमानत दे दी। अदालत ने व्यक्तिगत मुचलके और 25-25 हजार रुपये के दो बॉन्ड के आधार पर रिहाई का आदेश दिया।

अधिवक्ता वीके शर्मा के मुताबिक स्थानीय स्तर पर श्योरिटी बॉन्ड की राशि बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी गई। संबंधित दस्तावेज जमा कराए गए, जिन्हें सत्यापन के लिए भेजा गया।

जमानत के बाद भी सात दिन करना पड़ा इंतजार

हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद माना जा रहा था कि सबा जल्द जेल से बाहर आ जाएंगी, लेकिन कांवड़ यात्रा की व्यस्तता के चलते जमानत संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन समय पर नहीं हो सका। इसके चलते उन्हें रिहाई के लिए करीब सात दिन और इंतजार करना पड़ा।

गुरुवार शाम जेल से बाहर आने के बाद बेटा फराज अहमद उन्हें लेकर घर पहुंचा। मां को देखते ही वह भावुक हो गया। रात में बेटी ऐमन भी घर पहुंचीं और मां के गले लगकर रो पड़ीं। करीब छह महीने बाद परिवार के बीच लौटीं सबा के घर में खुशी के साथ भावनाओं का सैलाब भी नजर आया।

No comments:

Post a Comment

Popular Posts