मुजफ्फरनगर में 13 टीबी मरीजों को गोद लिया गया, BDO और सचिव ने संभाली जिम्मेदारी
मुजफ्फरनगर। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जिले में टीबी मरीजों की मदद के लिए सामाजिक सहभागिता बढ़ाई जा रही है। इसी क्रम में T.U. पुरकाजी में ब्लॉक BDO और ग्राम सचिव द्वारा 13 टीबी मरीजों को गोद लिया गया। इस पहल का उद्देश्य मरीजों को उपचार के साथ पोषण संबंधी सहयोग उपलब्ध कराना और उन्हें नियमित रूप से दवा लेने के लिए प्रोत्साहित करना है।
कार्यक्रम के दौरान टीबी मरीजों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं और उपचार व्यवस्था के बारे में भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने कहा कि टीबी के मरीजों के इलाज में नियमित दवा के साथ पौष्टिक आहार की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।
जिला क्षय रोग अधिकारी ने दी जानकारी
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. लोकेश गुप्ता ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी मरीजों को निशुल्क दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके अलावा सरकार की निक्षय पोषण योजना के तहत पात्र टीबी मरीजों को उपचार अवधि के दौरान पोषण सहायता दी जाती है। मरीजों की समय-समय पर काउंसलिंग कर उन्हें नियमित रूप से दवा लेने के लिए जागरूक किया जाता है।
उन्होंने कहा कि टीबी का इलाज संभव है, लेकिन मरीज को चिकित्सक की सलाह के अनुसार दवाओं का पूरा कोर्स नियमित रूप से लेना जरूरी है। बीच में दवा छोड़ने से बीमारी दोबारा गंभीर रूप ले सकती है और इलाज मुश्किल हो सकता है।
क्या हैं टीबी के प्रमुख लक्षण?
टीबी होने पर आमतौर पर दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक लगातार खांसी, बलगम आना, कभी-कभी बलगम में खून आना, सीने में दर्द, बुखार, रात में पसीना आना, भूख कम लगना, वजन कम होना और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
ऐसे लक्षण लंबे समय तक बने रहने पर व्यक्ति को बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच करानी चाहिए। समय पर जांच और उपचार शुरू होने से टीबी को गंभीर होने से रोका जा सकता है।
टीबी का उपचार कैसे होता है?
टीबी का उपचार सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर निशुल्क उपलब्ध है। जांच के बाद चिकित्सक मरीज की स्थिति के अनुसार दवाएं निर्धारित करते हैं। मरीज को निर्धारित अवधि तक नियमित रूप से दवा लेनी होती है और डॉक्टर की सलाह के बिना उपचार बीच में नहीं रोकना चाहिए।
अधिकारियों ने बताया कि टीबी से बचाव और उसके उन्मूलन के लिए सरकारी प्रयासों के साथ सामाजिक संस्थाओं, जनप्रतिनिधियों और आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है। मरीजों को गोद लेने जैसी पहल से उन्हें उपचार के दौरान पोषण और सामाजिक सहयोग मिल सकता है।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि लंबे समय से खांसी या टीबी से जुड़े अन्य लक्षण होने पर जांच कराने में लापरवाही न करें। समय पर पहचान और पूरा उपचार ही टीबी से मुक्ति का सबसे प्रभावी रास्ता है।


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