हंगामे के बीच शुरू हुआ संसद का मानसून सत्र
विपक्ष के विरोध से पहले दिन की कार्यवाही बाधित
नई दिल्ली, 20 जुलाई। संसद के मानसून सत्र का पहला दिन सोमवार को विपक्ष के जोरदार हंगामे और विभिन्न मुद्दों पर विरोध-प्रदर्शन के बीच शुरू हुआ। लोकसभा और राज्यसभा में महंगाई, कृषि संकट, कथित परीक्षा अनियमितताओं तथा अन्य मुद्दों को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा, जिसके कारण दोनों सदनों की कार्यवाही दिनभर बाधित रही और अंततः अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी गई।
सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राजनीतिक दलों से तथ्य और तर्क के आधार पर सार्थक चर्चा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद लोकतांत्रिक विमर्श का सर्वोच्च मंच है और यहां जनहित के मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा होनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने देश की विभिन्न विकास परियोजनाओं और युवाओं से जुड़े प्रयासों का भी उल्लेख किया।
इसी दौरान संसद के बाहर विभिन्न संगठनों और छात्र समूहों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा संबंधी अनियमितताओं और अन्य मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर संसद मार्ग और आसपास के क्षेत्रों में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया।
इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री एवं भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने प्रदर्शनकारी संगठन के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। बैठक के दौरान सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण संवाद बनाए रखने और आंदोलन समाप्त करने की अपील की गई। हालांकि, प्रदर्शनकारी प्रतिनिधियों ने कहा कि उनकी मांगों पर ठोस निर्णय होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
संसद का मानसून सत्र मध्य अगस्त तक चलने वाला है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार और विपक्ष के बीच प्रमुख मुद्दों पर सहमति नहीं बनती है, तो आगामी दिनों में भी सदन की कार्यवाही प्रभावित हो सकती है।


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