सीबीएसई की डिजिटल कॉपी जांच व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, छात्रों की शिकायतों पर केंद्र से मांगी रिपोर्ट
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की डिजिटल उत्तरपुस्तिका मूल्यांकन प्रणाली (ओएसएम) को लेकर छात्रों की शिकायतों पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस व्यवस्था से छात्रों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और उनमें निराशा बढ़ रही है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से इस मामले में सहयोग करने को कहा। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार को इस मुद्दे को विरोध के रूप में नहीं, बल्कि सुधार के अवसर के रूप में देखना चाहिए और इसका स्थायी समाधान तलाशना चाहिए।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि याचिका में जिन छात्रों के व्यक्तिगत मार्कशीट संबंधी मामलों का उल्लेख किया गया था, उनमें से अधिकांश का समाधान कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार कॉपी जांच प्रणाली में मौजूद खामियों को गंभीरता से ले रही है।
सरकार की ओर से बताया गया कि पूर्व वरिष्ठ अधिकारी एस. राधा चौहान की अध्यक्षता में एक सदस्यीय समिति गठित की गई है, जो डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की समीक्षा कर आवश्यक सुधारों के सुझाव देगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में केंद्र सरकार से स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी।
राकेश बिंजोला की ओर से दायर याचिका में सीबीएसई की उत्तरपुस्तिका जांच के लिए पारदर्शी और स्पष्ट नियम बनाने तथा उनकी निगरानी के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने की मांग की गई है। याचिका में यह भी कहा गया है कि जिन छात्रों को विश्वविद्यालयों या कॉलेजों में प्रवेश परीक्षा के आधार पर प्रोविजनल प्रवेश मिल चुका है, उन्हें बोर्ड के न्यूनतम अंकों की अनिवार्यता से राहत दी जानी चाहिए।
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सीबीएसई की संशोधित तीन-भाषा नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर भी केंद्र सरकार, सीबीएसई और एनसीईआरटी को नोटिस जारी किया था। अदालत ने सभी पक्षों से दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है और मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 29 जुलाई को निर्धारित की है।


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