पासपोर्ट-वीजा सेवाओं के टेंडर पर दिल्ली हाईकोर्ट की सख्ती, चार भारतीय मिशनों के लिए नए सिरे से होगी निविदा
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने विदेश मंत्रालय द्वारा अबू धाबी (यूएई), कुवैत, सिंगापुर और कैनबरा (ऑस्ट्रेलिया) स्थित भारतीय मिशनों में कांसुलर, पासपोर्ट और वीजा (सीपीवी) सेवाओं के आउटसोर्सिंग के लिए अपनाई गई तकनीकी मूल्यांकन प्रक्रिया को रद्द कर दिया है। अदालत ने इसे मनमाना, अतार्किक और अपारदर्शी बताते हुए संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन माना।
न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति शैल जैन की खंडपीठ ने ई ट्रैव टेक लिमिटेड और वेरासिस लिमिटेड की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। दोनों कंपनियों ने तकनीकी बोली के चरण में अयोग्य घोषित किए जाने को चुनौती दी थी।
अदालत ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में न्यायालय विशेषज्ञ समितियों के तकनीकी मूल्यांकन में हस्तक्षेप नहीं करता, लेकिन जब प्रक्रिया निष्पक्षता, पारदर्शिता और समानता के संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत हो, तब न्यायिक समीक्षा आवश्यक हो जाती है।
कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ताओं को दिए गए पैरामीटर-वार अंक मनमाने ढंग से निर्धारित किए गए। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कंपनियों को अंक तो उपलब्ध कराए, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि अंक किस आधार पर दिए गए या किन कारणों से काटे गए। अदालत ने कहा कि मूल्यांकन पत्रकों में न तो कमियों का उल्लेख है और न ही कम अंक देने का कोई स्पष्ट कारण दर्ज किया गया।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अलग-अलग भारतीय मिशनों में लगभग समान प्रस्तावों और दस्तावेजों को अलग-अलग अंक दिए गए, जबकि इसके पीछे कोई कारण रिकॉर्ड में मौजूद नहीं है। अदालत के अनुसार, समान सामग्री का समान मानदंडों पर मूल्यांकन होना निष्पक्ष टेंडर प्रक्रिया की मूल आवश्यकता है।
केंद्र सरकार ने यह दलील दी थी कि मामला पहले ही तय हो चुका है, इसलिए दोबारा सुनवाई नहीं हो सकती। हालांकि अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि पैरामीटर-वार अंक सामने आने के बाद नया कारण उत्पन्न हुआ, इसलिए याचिकाएं सुनवाई योग्य हैं।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि तकनीकी मूल्यांकन में मौखिक प्रस्तुति को आधार बनाया गया था, तो उसके कारण लिखित रूप में रिकॉर्ड में दर्ज होने चाहिए थे। केवल मौखिक दलीलें लिखित कारणों का विकल्प नहीं हो सकतीं।
हाईकोर्ट ने तकनीकी मूल्यांकन प्रक्रिया और सफल कंपनियों को दिए गए ठेके रद्द करते हुए विदेश मंत्रालय तथा संबंधित भारतीय मिशनों को एक महीने के भीतर नई रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी कर नई टेंडर प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है। हालांकि, नई निविदा प्रक्रिया पूरी होने तक मौजूदा सेवा प्रदाता अपना कार्य जारी रखेंगे, ताकि पासपोर्ट, वीजा और कांसुलर सेवाएं प्रभावित न हों।


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