मोदी कैबिनेट के तीन बड़े फैसले: यूरिया में आत्मनिर्भरता, सेमीकॉन 2.0 और ₹3,907 करोड़ की रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी


राष्ट्रीय निवेश नीति-2026 के तहत 8-9 नए यूरिया प्लांट लगेंगे, सेमीकंडक्टर क्षेत्र को मिलेगा ₹1.27 लाख करोड़ का प्रोत्साहन

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में देश की कृषि, उद्योग और बुनियादी ढांचे को गति देने वाले कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए राष्ट्रीय निवेश नीति-2026, सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए ‘सेमीकॉन 2.0’ योजना और ओडिशा-झारखंड में ₹3,907 करोड़ की रेलवे परियोजनाओं को हरी झंडी दी।

यूरिया उत्पादन बढ़ाने के लिए 8-9 नए प्लांट

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि देश में यूरिया की मांग लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में भारत को हर वर्ष लगभग 4 करोड़ टन यूरिया की जरूरत होती है, जबकि घरेलू उत्पादन करीब 3 करोड़ टन है। इस कमी को दूर करने के लिए राष्ट्रीय निवेश नीति-2026 के तहत प्राकृतिक गैस आधारित 8 से 9 नए आधुनिक यूरिया संयंत्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे अतिरिक्त 1 करोड़ टन उत्पादन क्षमता विकसित होगी और आयात पर निर्भरता कम होगी।

नई नीति में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए 12 से 16 प्रतिशत तक सुनिश्चित प्रतिफल, लागत आधारित स्मार्ट सब्सिडी व्यवस्था तथा विदेशी मुद्रा विनिमय जोखिम से सुरक्षा का प्रावधान किया गया है।

‘सेमीकॉन 2.0’ से चिप निर्माण को मिलेगा बढ़ावा

कैबिनेट ने देश में सेमीकंडक्टर उद्योग को मजबूत बनाने के लिए छह वर्षों की अवधि के लिए ₹1.27 लाख करोड़ की ‘सेमीकॉन 2.0’ योजना को भी मंजूरी दी है। सरकार का लक्ष्य इस योजना के माध्यम से करीब ₹4 लाख करोड़ का निवेश आकर्षित करना, सालाना ₹2 लाख करोड़ का चिप उत्पादन और ₹1 लाख करोड़ का निर्यात हासिल करना है।

सरकार के अनुसार, वर्ष 2028 तक देश की पहली सेमीकंडक्टर फैब शुरू होने की संभावना है। वर्तमान में 105 से अधिक स्टार्टअप चिप डिजाइन के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं और 315 विश्वविद्यालयों में 68 हजार से अधिक छात्रों को चिप डिजाइनिंग का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

ओडिशा और झारखंड को रेलवे परियोजनाओं की सौगात

कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने ₹3,907 करोड़ की लागत वाली दो रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें ओडिशा के पारादीप-हरिदासपुर रेलखंड का दोहरीकरण तथा झारखंड-ओडिशा सीमा पर राजखरसावां-डांगोपोसी रेलखंड पर चौथी लाइन का निर्माण शामिल है। इन परियोजनाओं को वर्ष 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

सरकार के अनुसार, इन परियोजनाओं से लगभग 145 किलोमीटर अतिरिक्त रेल नेटवर्क विकसित होगा, जिससे ओडिशा और झारखंड के 1,526 गांवों की करीब 14 लाख आबादी को लाभ मिलेगा। साथ ही खनिज परिवहन, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा मिलेगा।

पर्यावरण और ऊर्जा क्षेत्र में भी होगा लाभ

सरकार का दावा है कि रेलवे परियोजनाओं के पूरा होने के बाद हर वर्ष लगभग 6 करोड़ लीटर तेल की बचत होगी और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में करीब 29 करोड़ किलोग्राम की कमी आएगी, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

No comments:

Post a Comment

Popular Posts