माटीकला को मिलेगी बाजार की नई उड़ान

 कारीगरों को आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का प्रशिक्षण

माटीकला स्थापना पखवाड़े में करीब 200 कारीगरों ने लिया प्रशिक्षण, दीपावली से पहले लगेगा विशेष माटीकला मेला; कुम्हारों को मिलेंगे निःशुल्क स्टॉल

मेरठ। माटीकला स्थापना पखवाड़े के अंतर्गत शुक्रवार को जिला पंचायत सभागार, कचहरी परिसर में एक दिवसीय माटीकला जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड द्वारा संचालित माटीकला विपणन विकास सहायता एवं प्रचार-प्रसार योजना के तहत आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य आमजन में मिट्टी से बने उत्पादों के उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ माटीकला कारीगरों को नवीन तकनीकों और बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने के लिए प्रशिक्षित करना रहा। कार्यक्रम में जनपद के करीब 200 माटीकला कारीगरों एवं लाभार्थियों ने प्रतिभाग किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष गौरव चौधरी रहे। इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य पूनम शर्मा, उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड के प्रतिनिधि घनश्याम प्रजापति सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

जिला ग्रामोद्योग अधिकारी मान्या चतुर्वेदी ने माटीकला बोर्ड की विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को बैंक के माध्यम से 10 लाख रुपये तक का ऋण 25 प्रतिशत अनुदान के साथ उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा पात्र कारीगरों को विद्युत चालित चाक, पगमिल मशीन और अन्य आधुनिक टूलकिट निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। कारीगरों के कौशल विकास और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि दीपावली से पहले विशेष माटीकला मेले का आयोजन किया जाएगा। इसमें कुम्हारों को निःशुल्क स्टॉल उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे त्योहार के सीजन में उनके उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के साथ उन्हें प्रदर्शन और विपणन का बेहतर अवसर मिल सके।

प्रशिक्षण के दौरान प्रसिद्ध कलाकार शिप्रा शर्मा ने कारीगरों को माटीकला उत्पादों में वैल्यू एडिशन के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने पेंटिंग, सजावटी कलाकृतियों और अन्य कलात्मक तकनीकों के माध्यम से मिट्टी से बने उत्पादों को आकर्षक, आधुनिक और बाजारोन्मुख बनाने का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने कहा कि बदलती उपभोक्ता मांग के अनुरूप नवाचार अपनाकर कारीगर अपने उत्पादों का मूल्य और बिक्री दोनों बढ़ा सकते हैं।

माटीकला प्रशिक्षक श्यामसुंदर ने विद्युत चालित चाक से विभिन्न माटीकला उत्पाद तैयार करने का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। उन्होंने आधुनिक उपकरणों के उपयोग, उत्पादन प्रक्रिया को सरल बनाने और कम समय में बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार करने की तकनीक से कारीगरों को अवगत कराया। प्रशिक्षण सत्र में प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया और आधुनिक माटीकला तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।

मुख्य अतिथि गौरव चौधरी ने कुम्हार समुदाय की सराहना करते हुए कहा कि सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण में इस समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका है। वर्तमान समय में पर्यावरण-अनुकूल और हस्तनिर्मित उत्पादों, विशेषकर मिट्टी के बर्तनों एवं सजावटी वस्तुओं की मांग लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कारीगरों से उत्पादन बढ़ाने, गुणवत्ता में सुधार करने और नए डिजाइनों को अपनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान मेरठ क्षेत्र के कुम्हारों ने मिट्टी की उपलब्धता से जुड़ी समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। इस पर जनप्रतिनिधियों, माटीकला बोर्ड के प्रतिनिधियों और अधिकारियों ने चर्चा की तथा समस्या के समाधान के लिए आवश्यक प्रयास करने का आश्वासन दिया।

अंत में कारीगरों ने प्रशिक्षण, सरकारी योजनाओं की जानकारी और विपणन संबंधी मार्गदर्शन को उपयोगी बताते हुए ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता जताई। कार्यक्रम का उद्देश्य माटीकला कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाना, उनकी आय में वृद्धि करना और पारंपरिक माटीकला उद्योग को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप सशक्त बनाना रहा।

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