छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
डीएम की अनुपस्थिति में एसडीएम ने लिया ज्ञापन, छात्र नेताओं ने नई दिल्ली में आंदोलनरत छात्रों पर कथित लाठीचार्ज की न्यायिक जांच और एफआईआर वापस लेने की उठाई मांग
मेरठ। देशभर में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दों, छात्र-छात्राओं के लोकतांत्रिक अधिकारों और नई दिल्ली में शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों पर हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध में मंगलवार को राष्ट्रपति के नाम जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया। जिलाधिकारी की अनुपस्थिति में उपजिलाधिकारी ने ज्ञापन प्राप्त किया। अधिवक्ता एवं छात्र नेता आदेश प्रधान, किसान नितिन बालियान तथा छात्र नेता अनुज भड़ाना के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक आधार पर इस्तीफा लेने सहित कई मांगें उठाई गईं।
ज्ञापन में नई दिल्ली में छात्र-छात्राओं पर हुए कथित लाठीचार्ज की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराने, आंदोलन में शामिल विद्यार्थियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर तत्काल निरस्त करने तथा बल प्रयोग के लिए जिम्मेदार पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की मांग की गई।
अधिवक्ता एवं छात्र नेता आदेश प्रधान ने कहा कि देश का युवा शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता और अपने भविष्य को लेकर गंभीर चिंता में है। छात्र लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पारदर्शिता और अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठा रहे हैं। उनकी समस्याओं के समाधान के बजाय बल प्रयोग किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। लोकतंत्र में जनता की आवाज का जवाब संवाद और संवेदनशीलता से दिया जाना चाहिए, न कि लाठीचार्ज और मुकदमों से।
छात्र नेताओं ने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों पर कथित लाठीचार्ज और उसके बाद एफआईआर दर्ज करना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दे उठाने वाले छात्रों को अपराधी की तरह प्रस्तुत करना उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन है। इससे विद्यार्थियों में भय और निराशा का माहौल बनता है।
ज्ञापन में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े सामने आए विभिन्न सवालों का उल्लेख करते हुए नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार कर उनके इस्तीफे की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।
छात्र नेता नितिन बालियान ने कहा कि देश का युवा न्याय, पारदर्शिता और सम्मान चाहता है। शांतिपूर्ण आंदोलन करने वाले छात्रों पर बल प्रयोग किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। सरकार को छात्रों की आवाज सुनकर शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए गंभीर पहल करनी चाहिए।
ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि घायल छात्र-छात्राओं को समुचित चिकित्सा सुविधा एवं मुआवजा दिया जाए, छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस ली जाएं और भविष्य में शांतिपूर्ण आंदोलनों पर अनावश्यक बल प्रयोग रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। साथ ही छात्र संगठनों के साथ सम्मानजनक संवाद स्थापित कर उनकी मांगों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने की मांग की गई।
इस अवसर पर छात्र नेता अनुज भड़ाना, आकाश भड़ाना, राहुल वर्मा, शुभम उपाध्याय, विजरा चपराना, राहुल अरजक, नितिन बालियान, समाजवादी नेता जानू चौधरी, गौरव राणा, रोहित सिंह, रचित सिंह, शुभम राणा सहित अनेक छात्र-छात्राएं, युवा एवं सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।


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