सीसीएसयू में ‘दयानारायण निगम और ज़माना’ विषय पर ऑनलाइन संगोष्ठी आयोजित

राष्ट्रीय एकता, स्वतंत्रता संग्राम और उर्दू साहित्य में ‘ज़माना’ के योगदान पर वक्ताओं ने डाला प्रकाश

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) के उर्दू विभाग एवं आयुसा (IYUSA) के संयुक्त तत्वावधान में “दयानारायण निगम और ज़माना” विषय पर ऑनलाइन संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में वक्ताओं ने पत्रिका ‘ज़माना’ के साहित्यिक, सामाजिक और राष्ट्रीय योगदान पर विस्तार से चर्चा करते हुए इसे उर्दू साहित्य और स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास की एक महत्वपूर्ण पत्रिका बताया।

मुख्य अतिथि डॉ. खान फारूक, अध्यक्ष, उर्दू विभाग, हलीम पीजी कॉलेज, कानपुर ने कहा कि ‘ज़माना’ का प्रकाशन पहले बरेली और बाद में कानपुर से हुआ। उन्होंने बताया कि उस दौर में कानपुर पत्र-पत्रिकाओं के प्रकाशन का प्रमुख केंद्र था और ‘ज़माना’ में सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक एवं साहित्यिक विषयों पर गंभीर लेख प्रकाशित होते थे। उन्होंने दयानारायण निगम और ‘ज़माना’ पर नए दृष्टिकोणों से व्यापक शोध की आवश्यकता पर भी बल दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध साहित्यकार एवं आलोचक प्रो. सगीर अफ़राहीम ने की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता और स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में ‘ज़माना’ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने यह भी बताया कि मुंशी प्रेमचंद की अनेक समीक्षाएँ भी इसी पत्रिका में प्रकाशित हुई थीं।

उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो. असलम जमशेदपुरी ने कहा कि दयानारायण निगम ने पत्रिका की गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं किया। उनके संपादन में अल्लामा इक़बाल, मुंशी प्रेमचंद और अब्दुल माजिद दरियाबादी जैसे प्रतिष्ठित साहित्यकारों की रचनाएँ प्रकाशित हुईं। उन्होंने कहा कि बीसवीं शताब्दी के प्रारंभिक दौर में उर्दू साहित्य की सेवा करने वाली पत्रिकाओं में ‘ज़माना’ का विशेष स्थान रहा।

विशिष्ट अतिथि डॉ. मसीहुद्दीन ने कहा कि दयानारायण निगम राष्ट्रीय एकता के अग्रदूत थे। उन्होंने बताया कि मुंशी प्रेमचंद का नाम तथा उनकी पहली कहानी "दुनिया का सबसे अनमोल रत्न" पहली बार ‘ज़माना’ में प्रकाशित हुई थी। वहीं डॉ. हिना अफ़्शाँ ने कहा कि प्रेमचंद को "मुंशी प्रेमचंद" के रूप में स्थापित करने का श्रेय भी दयानारायण निगम को जाता है।

आयुसा की अध्यक्ष प्रो. रेशमा परवीन ने कहा कि ‘ज़माना’ ने अनेक महत्वपूर्ण साहित्यकारों को विशिष्ट पहचान दिलाई और ऐसे कार्यक्रम शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होते हैं।

कार्यक्रम का शुभारंभ सईद अहमद द्वारा पवित्र कुरआन के पाठ से हुआ। डॉ. अरशा सियानवी ने स्वागत भाषण दिया तथा डॉ. ओवैस जमाल शम्सी ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस अवसर पर डॉ. मुजीब शहरज़र ने अपना शोधपत्र प्रस्तुत करते हुए ‘ज़माना’ की साहित्यिक और सामाजिक भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।

संगोष्ठी में डॉ. अली मोहम्मद आसिफ (मॉरीशस), नाज़िया बेगम जफ़ूखान (मॉरीशस), प्रो. सरवत खान, डॉ. शादाब अलीम, डॉ. अलका वशिष्ठ, मोहम्मद आबिद, मोहम्मद शमशाद, वाजिद मेरठी, फरहत अख्तर, सैयदा मरियम इलाही सहित बड़ी संख्या में शोधार्थियों एवं छात्र-छात्राओं ने ऑनलाइन सहभागिता की।

No comments:

Post a Comment

Popular Posts