यूपी में पहली बार जिला पंचायत अध्यक्ष बने प्रशासक, सरकार का आदेश जारी

11 जुलाई से नई व्यवस्था लागू, नीतिगत फैसलों पर रोक; ग्राम प्रधानों का मामला हाईकोर्ट में लंबित

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने पहली बार सभी 75 जिला पंचायत अध्यक्षों को उनके कार्यकाल की समाप्ति के बाद प्रशासक नियुक्त करने का निर्णय लिया है। पंचायती राज विभाग ने शुक्रवार शाम इस संबंध में आदेश जारी कर दिया। जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल 11 जुलाई को समाप्त हो रहा था।

पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बताया कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। सामान्यतः कार्यकाल समाप्त होने पर जिला पंचायत का प्रशासक संबंधित जिलाधिकारी को बनाया जाता है, लेकिन इस बार सरकार ने मौजूदा अध्यक्षों को ही प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपी है।

सरकार के आदेश के अनुसार प्रशासक के रूप में जिला पंचायत अध्यक्ष दैनिक प्रशासनिक कार्य, विकास योजनाओं और नियमित कार्यों का संचालन करते रहेंगे, लेकिन वे कोई नया नीतिगत या वित्तीय महत्व का बड़ा निर्णय नहीं ले सकेंगे।

सरकार अब प्रदेश के 826 ब्लॉक प्रमुखों को भी इसी तर्ज पर प्रशासक नियुक्त करने की तैयारी में है। उनका कार्यकाल भी अगले सप्ताह समाप्त हो रहा है। इससे पहले सरकार 57 हजार से अधिक ग्राम प्रधानों को भी प्रशासक नियुक्त करने का आदेश जारी कर चुकी है, जिसकी वैधता को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।

सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य पंचायतों में विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखना और प्रशासनिक कामकाज को प्रभावित होने से बचाना है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस निर्णय का असर पंचायत स्तर की राजनीतिक गतिविधियों और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर भी पड़ सकता है।

उधर, ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के आदेश को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है। अदालत पहले ही पंचायत चुनाव में देरी और प्रशासक नियुक्त करने के संबंध में सरकार से जवाब मांग चुकी है। इस मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को प्रस्तावित है। ऐसे में जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक बनाए जाने के निर्णय पर भी कानूनी बहस की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

अब 11 जुलाई से सभी जिला पंचायत अध्यक्ष प्रशासक के रूप में कार्यभार संभालेंगे। वहीं प्रदेश में पंचायत चुनाव की समय-सीमा और सरकार की नई व्यवस्था पर सभी की निगाहें इलाहाबाद हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं।

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