विश्व जनसंख्या दिवस (11 जुलाई) पर विशेष
स्वस्थ और सशक्त समाज के निर्माण की आधारशिला है परिवार नियोजन : मुकेश शर्मा
लखनऊ, 10 जुलाई। पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल (पीएसआई) इंडिया के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर मुकेश शर्मा ने कहा कि स्वस्थ, खुशहाल और आर्थिक रूप से सशक्त परिवार ही समृद्ध समाज और विकसित राष्ट्र की मजबूत नींव होते हैं। परिवार नियोजन अपनाकर न केवल मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुरक्षित रखा जा सकता है, बल्कि परिवार को बेहतर शिक्षा, पोषण और आर्थिक स्थिरता भी सुनिश्चित की जा सकती है।
विश्व जनसंख्या दिवस (11 जुलाई) के अवसर पर जारी अपने संदेश में उन्होंने कहा कि परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता बढ़ाने में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष विश्व जनसंख्या दिवस की थीम "युवाओं की आशाओं और आकांक्षाओं को साकार करना—आज और भविष्य के लिए" निर्धारित की गई है।
उन्होंने कहा कि बेटियों का विवाह 21 वर्ष की आयु के बाद ही किया जाना चाहिए तथा विवाह के दो से तीन वर्ष बाद ही संतान की योजना बनानी चाहिए। इस अवधि में पति-पत्नी एक-दूसरे को बेहतर ढंग से समझने के साथ-साथ अपने भविष्य और परिवार के लिए आवश्यक आर्थिक एवं सामाजिक तैयारी भी कर सकते हैं।
मुकेश शर्मा ने कहा कि भारत लगभग 147 करोड़ की आबादी के साथ विश्व का सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है। सीमित प्राकृतिक संसाधनों के बीच संतुलित विकास और बेहतर जीवन स्तर सुनिश्चित करने के लिए परिवार के आकार को नियोजित रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रथम गर्भधारण 21 वर्ष की आयु के बाद होना चाहिए तथा दो बच्चों के जन्म के बीच कम-से-कम तीन वर्ष का अंतर रखा जाना चाहिए। इससे मां के स्वास्थ्य को पर्याप्त समय मिलता है और बच्चे का पालन-पोषण भी बेहतर तरीके से हो पाता है।
उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा परिवार नियोजन के लिए "बास्केट ऑफ चॉइस" के अंतर्गत अनेक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं। दंपति अपनी आवश्यकता और स्वास्थ्य के अनुसार उपयुक्त साधन का चयन कर सही समय पर परिवार बढ़ाने का निर्णय ले सकते हैं।
मुकेश शर्मा ने कहा कि अस्थायी गर्भनिरोधक साधनों में अंतरा त्रैमासिक गर्भनिरोधक इंजेक्शन एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है, जिसका एक इंजेक्शन तीन माह तक अनचाहे गर्भधारण से सुरक्षा प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त ओरल गर्भनिरोधक गोलियां, पुरुष कंडोम, आईयूसीडी, प्रसवोत्तर एवं गर्भसमापन पश्चात आईयूसीडी तथा हार्मोनल गोली छाया (सेंटक्रोमैन) भी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों पर उपलब्ध हैं। परिवार नियोजन किट (कंडोम बॉक्स) की व्यवस्था भी स्वास्थ्य केंद्रों पर की गई है।
उन्होंने बताया कि जिन दंपतियों का परिवार पूरा हो चुका है, उनके लिए सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों पर महिला एवं पुरुष नसबंदी की निःशुल्क सेवाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि पुरुष नसबंदी एक सरल, सुरक्षित और कम समय में होने वाली प्रक्रिया है, जिसे समाज में अधिक स्वीकार्यता मिलनी चाहिए।
प्रमुख संदेश
- बेटियों का विवाह 21 वर्ष की आयु के बाद करें।
- विवाह के 2–3 वर्ष बाद ही संतान की योजना बनाएं।
- दो बच्चों के जन्म के बीच कम-से-कम 3 वर्ष का अंतर रखें।
- परिवार नियोजन के सुरक्षित साधनों का उपयोग करें।
- स्वस्थ परिवार ही सशक्त समाज और विकसित राष्ट्र का आधार है।
अंत में मुकेश शर्मा ने युवाओं से आह्वान किया कि वे परिवार नियोजन को केवल जनसंख्या नियंत्रण का विषय न मानें, बल्कि स्वस्थ परिवार, सुरक्षित मातृत्व, उज्ज्वल भविष्य और सशक्त भारत के निर्माण का सशक्त माध्यम समझते हुए इसे अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं।


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